हरेला 2026: उत्तराखंड में पहली बार एक्शन प्लान के साथ चलेगा हरित अभियान, 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
वन पंचायतों, जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयास से तैयार हुई रणनीति; महिलाओं की 50% भागीदारी, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से भी जुड़ेगा हरेला

उत्तराखंड में इस बार हरेला पर्व सिर्फ पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेगा। पहली बार इस पारंपरिक पर्यावरण उत्सव को एक सुनियोजित एक्शन प्लान के तहत आयोजित किया जाएगा। वन पंचायतों ने जिला प्रशासन और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ मिलकर ऐसी रणनीति तैयार की है, जिसका उद्देश्य पौधारोपण को अधिक प्रभावी, जनभागीदारी आधारित और टिकाऊ बनाना है।
राज्यभर में इस अभियान के तहत करीब 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पौधों की उपलब्धता, रोपण स्थलों का चयन, स्थानीय जलवायु के अनुसार प्रजातियों का निर्धारण और समयबद्ध कार्ययोजना पहले ही तैयार की जा चुकी है।
अब तक हरेला के दौरान अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर पौधारोपण कार्यक्रम चलाते थे, लेकिन इस वर्ष पहली बार सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर साझा कार्ययोजना बनाई गई है। इसमें पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण, नियमित निगरानी और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि लगाए गए पौधों के जीवित रहने की संभावना बढ़ सके।
अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है। सरकार का मानना है कि महिलाओं की सक्रिय भूमिका पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज में जागरूकता बढ़ाने में भी अहम योगदान देगी।
इस वर्ष हरेला अभियान को केंद्र सरकार के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से भी जोड़ा जाएगा। लोगों को अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। वन पंचायतें इस संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम करेंगी।
जिला स्तर पर अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को सौंपी गई है। वहीं, विभिन्न विभागों के अधिकारी, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायतें और स्थानीय समितियां भी इस अभियान का हिस्सा होंगी। इसका उद्देश्य सरकारी संसाधनों और जनसहभागिता का बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
प्रदेश में हरेला पर्व की शुरुआत 16 जुलाई से होगी और यह अभियान एक महीने तक चलेगा। इस दौरान पौधारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण, जनजागरूकता और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों, महिला समूहों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय संगठनों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।
इस बार प्रदेश स्तरीय मुख्य कार्यक्रम अल्मोड़ा में वन पंचायत के स्तर पर आयोजित होगा। सरकार और वन पंचायतों को उम्मीद है कि पहली बार तैयार की गई यह कार्ययोजना हरेला अभियान को केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।