गढ़वाल मंडल के वन स्टॉप सेंटर कर्मियों और पुलिस के लिए राज्य महिला आयोग की बड़ी पहल; राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से दिया प्रशिक्षण
देहरादून में गढ़वाल मंडल के ओएससी कार्मिकों व महिला हैल्पडेस्क पुलिसकर्मियों तथा विधिक प्रतिनिधियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न; जमीनी स्तर पर तैयार होंगे 'मास्टर ट्रेनर्स'

उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुक्रम में आज यू.सी.एफ. सदन के सभागार देहरादून में एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यशाला मुख्य रूप से उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के समस्त जनपदों (देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग) के वन स्टॉप सेंटरों (OSCs) के काउंसिलर्स, केस वर्कर्स, उनमें संबद्ध महिला चिकित्सकों, महिला हेल्प डेस्क के पुलिसकर्मियों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के अधिवक्ताओं/प्रतिनिधियों तथा संरक्षण अधिकारियों के आपसी समन्वय और क्षमता संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित की गई।
कार्यशाला का शुभारंभ उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की माननीय अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल एवं उपस्थित विषय विशेषज्ञों द्वारा दीप प्रज्वलन और रिसोर्स पर्सन्स के सम्मान व अभिवादन के साथ किया गया। इस अवसर पर महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग की निदेशक (निदेशक आईसीडीएस), राज्य महिला आयोग के विधिक अधिकारी सहित कई वरिष्ठ विभागीय अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अयोगअध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि हमारी सरकार, राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों, कल्याण और सुरक्षा को लेकर अत्यंत संवेदनशील हैं। पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने और उनके अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर और सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं, और आज की यह कार्यशाला इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अध्यक्ष ने कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए कहा कि जब कोई महिला घरेलू हिंसा, यौन शोषण, या कार्यस्थल पर प्रताड़ना जैसी विभिन्न विभीषिकाओं को झेलते हुए भारी सामाजिक और पारिवारिक डर के बावजूद बड़ी हिम्मत के साथ हमारे पास आती है, तो सबसे पहली मुलाकात आप सभी से होती है। उस संवेदनशील समय में पीड़िता के मन में समाज और परिवार में छवि खराब होने का भारी डर होता है। ऐसे में यह कार्यशाला आप सभी को यह सिखाने के लिए है कि कैसे उस पीड़िता की गोपनीयता को अक्षुण्ण रखते हुए उसे न्याय की राह पर आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से आयोजित इस ट्रेनिंग का उद्देश्य केवल खुद सीखकर बैठ जाना नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से हमें मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने हैं। आप सभी यहां से कुशल प्रशिक्षण लेकर भविष्य में समाज के अन्य स्तरों पर भी ऐसी ट्रेनिंग देने के लिए तैयार रहें, ताकि सरकार द्वारा सौंपी गई इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा से निर्वहन हो सके और पीड़ित महिलाओं को एक सुरक्षित माहौल मिल सके। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार भी प्रकट किया।


कार्यशाला के दौरान विधिक सत्र में उच्च न्यायालय नैनीताल के सेवानिवृत्त रजिस्ट्रार जनरल वी०के० माहेश्वरी ने नए कानूनी परिदृश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के नवीन प्रावधानों, घरेलू हिंसा अधिनियम, और पोक्सो अधिनियम के तहत महिलाओं से जुड़े कानूनों के व्यावहारिक अनुप्रयोग की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि इन नवीन संहिताओं के माध्यम से कानूनी प्रक्रियाओं में गति लाकर कैसे पीड़ित महिलाओं को त्वरित राहत पहुंचाई जा सकती है।
दून विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डॉ० राजेश भट्ट ने ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड काउंसलिंग पर बेहद विस्तृत व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गंभीर शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना झेल चुकी महिला जब केंद्र पर आती है, तो उसकी मानसिक स्थिति अत्यंत नाजुक होती है। एक काउंसलर को सबसे पहले उसकी प्रताड़ना के स्तर को सहानुभूतिपूर्वक समझने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि वह अधिक डिप्रेशन या भारी मानसिक दबाव में न चली जाए। उन्होंने कर्मियों को ऐसी मनोवैज्ञानिक कला सिखाई जिससे पीड़िता सुरक्षित महसूस करे और बिना किसी डर के अपनी बात खुलकर कह सके। इसके साथ ही कर्मियों को स्वयं के मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के गुर भी सिखाए गए।



अगले सत्र में स्वास्थ्य विभाग की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ० वन्दना सुन्द्रियाल ने चिकित्सा सुविधाओं से संबंधित बेहद संवेदनशील व व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने बारीकी से समझाया कि जब कोई पीड़िता, चाहे वह दुष्कर्म जैसी जघन्य यौन अपराध की शिकार हो या घरेलू हिंसा से पीड़ित होकर वन स्टॉप सेंटर या थाने पर पहुंचती है, तो सबसे पहले उसकी गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने ‘गोल्डन आवर’ (पहले घंटे) के भीतर तत्काल फर्स्ट एड (प्राथमिक उपचार), त्वरित चिकित्सा सहायता मेडिकल कराने से लेकर विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श दिलाने की पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि मेडिकल एग्जामिनेशन के दौरान पीड़िता को कैसे पूरी संवेदनशीलता उसकी पहचान की गोपनीयता बनाए रखते हुए और गरिमा के साथ ट्रीट और सपोर्ट करना है।
इसके पश्चात पुलिस क्षेत्राधिकारी डोईवाला वन्दना वर्मा ने कार्यशाला में डिजिटल एविडेंस व साइबर अपराध तथा आपसी समन्वय पर महत्वपूर्ण सत्र लिया। उन्होंने रेखांकित किया कि पीड़िता को संपूर्ण व त्वरित न्याय दिलाने के लिए पुलिस विभाग, वन स्टॉप सेंटर के कार्मिकों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों के बीच एक मजबूत त्रिकोणीय समन्वय होना आवश्यक है। इसके साथ ही, उन्होंने वर्तमान समय में साइबर स्टॉकिंग, ब्लैकमेलिंग और डिजिटल फ्रॉड जैसी साइबर क्राइम की शिकार महिलाओं को हैंडल करने, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उन्हें कानूनी न्याय दिलाने के प्रयासों पर विस्तृत जानकारी दी।
अंतिम तकनीकी सत्र में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के विशेषज्ञ श्री संजय प्रकाश एवं सुश्री सुप्रिया चन्द्र जेंडर संवेदीकरण और वन स्टॉप सेंटर महिला कल्याण विभाग सहित सरकारी योजनाओं के साथ पीड़िता को क्या सुविधा दी जा सकती हैं यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कोई महिला मदद के लिए आए, तो समाज के किसी भी पुराने पूर्वाग्रह या जजमेंटल रवैये को पूरी तरह किनारे रखकर, पूर्ण संवेदनशीलता और सर्वाइवर-सेंट्रिक अप्रोच के साथ व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी और पुनर्वास योजनाओं की जानकारी दी ताकि समाज में जेंडर आधारित कोई विशेष भेदभाव न हो और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
कार्यशाला के अंतिम खुले सत्र में गढ़वाल मंडल से आए सभी वन स्टॉप सेंटर के कार्मिकों, महिला हेल्प डेस्क कर्मियों, अधिवक्ताओं और सीडीपीओ ने विषय विशेषज्ञों से सीधे सवाल-जवाब कर अपनी व्यावहारिक शंकाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम में उपस्थित बाल विकास विभाग की निदेशक आईसीडीएस प्रतिभागियों से कहा कि सभी मिलकर एक टीम की तरह कार्य करें।
कार्यक्रम के समापन पर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की सदस्य-सचिव उर्वशी चौहान ने राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम, सभी विषय विशेषज्ञों और गढ़वाल क्षेत्र के कोने-कोने से आए सभी प्रतिभागियों का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस क्षमता निर्माण कार्यशाला के अवसर पर विशेष रूप से राज्य महिला आयोग के उपाध्यक्ष चंद्रकला तिवारी, निदेशक आई०सी०डी०एस० बी०एल० राणा, आयोग के विधि अधिकारी दयाराम सिंह, आयोग में संबद्ध एस०आई० स्वाति चमोली, कनिष्ठ सहायक शानू रावत, वीरेंद्र रावत, कांस्टेबल जुगनू धीमान सहित, नीता कांडपाल आयोग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।