उत्तराखंड

अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्लजी( आजाद हिंद फौज) का 82वाँ श्रद्धांजलि दिवस

आज दिनांक 25 अगस्त 2026 उत्तराखण्ड राज्य नेपाली भाषा समिति के तत्वाधान में , शहीद मेजर दुर्गा मल्ल पार्क में — शहीद मेजर दुर्गा मल्लजी(आजाद हिंद फौज) की पुण्यतिथि के अवसर पर 82वें श्रद्धांजलि दिवस कार्यक्रम का आयोजन हुआ |
इस आयोजन में मुख्य अतिथि श्रीमती ज्योति कोटिया राज्यमंत्री, विशिष्ट अतिथि कै॰शमशेर सिंह बिष्ट जी राज्यमंत्री , गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष श्री पदम सिंह थापाजी , उत्तराखण्ड राज्य नेपाली भाषा समिति के अध्यक्ष श्री मधुसूदन शर्माजी , इंजि०मेग बहादुर थापा जी,श्री राजेन्द्र मल्ल ,श्री शैलेन्द्र मल्ल ,पार्षद सोमेंद्र बोहरा जी , पूर्व डीएफओ इंद्रेश उपाध्याय जी ,श्रीमती मधु गुरूंग जी एवं संघ संस्थाओं के पदाधिकारियों ने शहीद मेजर दुर्गामल्ल पार्क में स्थित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा सुमनअर्पित करते हुए माल्यार्पण किया एवं दीप प्रज्जवित करते हुए उन्हें शत् शत् नमन किया |
इस अवसर पर प्रात: 6:30बजे गांधी पार्क से शहीद दुर्गा मल्ल पार्क गढ़ी कैंट तक साइकिल रैली का आयोजन भी किया गया ।
जीवन परिचय
शहीद मेजर दुर्गा मल्लजी (1जुलाई 1913 –25 अगस्त1944 ) आजाद हिंद फौज के प्रथम गोर्खा सैनिक थे जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी | दुर्गा मल्ल का जन्म 1जुलाई 1913 को देहरादून के निकट डोईवाला में गोर्खा राईफल्स के नायब सुबेदार गंगाराम मल्ल क्षेत्री एवं पार्वती देवी के घर में हुआ | वे बचपनसे ही बहादुर और प्रतिभा वान थे |उन्होंने गोर्खा मिलट्री इंटर कालेज में अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की |
सन् 1931 में मात्र 18 वर्ष की आयु में दुर्गा मल्लजी 2/1 गोर्खा राईफल्स में भर्ती हो गये |लगभग 10 वर्ष तक सेवारत रहने के बाद
जब 01 सितम्बर 1942 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा ” आजाद हिंद फौज ” का गठन हुआ, जिसमें दुर्गा मल्ल की भूमिका बहुत सराहनीय थी |जिससे प्रभावित होकर नेताजी ने उन्हें मेजर की पदवी से नवाजा |बाद में उन्हें गुप्तचर शाखा का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा गया |27 मार्च 1944 को महत्वपूर्ण सूचनाऐं एकत्र करते समय मेजर दुर्गा मल्ल को अंग्रेजी सेना ने मणिपुर में कोहिमा के पास उखरूल में पकड़ लिया |युद्धबंदी बनाने और मुकदमें के बाद उन्हें बहुत कठिन यातनाएँ दी गईं और उन्हें माफी माँगने को कहा गया |परंतु आजादी के दीवाने दुर्गा मल्ल ने माफी नहीं माँगी | 15 अगस्त 1944 को उन्हें लालकिले की सैंट्रल जेल में लाया गया और दस दिन बाद 25 अगस्त 1944 को उन्हें फाँसी के फंदे पर चढा़ दिया गया | जाँबाज वीर मेजर दुर्गा मल्ल ने हँसते हँसते माँ भारती की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया |
23 जनवरी 2023 को भारत सरकार ने शहीद मेजर दुर्गा मल्ल जी के सम्मान में उनके नाम पर डाकटिकट भी जारी किया है |
कार्यक्रम
मीडिया प्रभारी प्रभा शाह कि इस अवसर पर कौसेली सांगितिक ग्रुप एवं संगीत प्रेमी परिवार के कलाकारों ने देशभक्ति गीतों की सुंदर प्रस्तुतियाँ दीं | श्रीमती संकल्प पंथ ने कविता पाठ किया। श्री महेश भूषाल जी ने मेजर दुर्गा मल्ल जी की जीवनी से अवगत कराया।
कार्यक्रम का सफल संचालन महासचिव श्री श्याम राना एवं उपाध्यक्ष श्रीमती पूजा सुब्बा चंद ने किया |
आज इस समारोह में पूर्व अध्यक्ष श्री बालकृष्ण बराल , कार्यक्रम अध्यक्ष श्री राजेंद्र मल्ल, , श्री सी०के०राई, कर्नल.विक्रम सिंह थापा , कर्नल डी एस खड़का, कर्नल जीवन क्षेत्री,सभा के शाखा अध्‍यक्ष, श्रीमती सीता शर्मा ,उमा उपाध्याय , श्रीमती पुष्पा क्षेत्री ,
श्रीमती रीता विशाल,श्रीमती सुनीता क्षेत्री, उपासना थापा, एवं भारी संख्या में उपस्थित होकर सभी ने शहीद को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये |

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