नैनीताल के ज्योलीकोट में दूषित पानी से हाहाकार: शुरुआती जांच में सभी 9 सैंपल फेल, 3 की मौत और 250 से ज्यादा बीमार
मुख्य पेयजल लाइन में सीवर का पानी मिलने से फैली बीमारी, हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद 24 अन्य नमूनों की थर्ड पार्टी जांच जारी

देहरादून: नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में फैले जलजनित रोग और स्वास्थ्य संकट के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की शुरुआती जांच रिपोर्ट में क्षेत्र के नौ प्रमुख स्थानों से लिए गए पानी के सभी नौ सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट के अनुसार, पेयजल के इन नमूनों में इंसानी और जानवरों के अपशिष्ट से उत्पन्न होने वाले खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि आपूर्ति किया जा रहा पानी मानव उपभोग के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं था। इस दूषित पानी के सेवन से अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 250 से अधिक ग्रामीण उल्टी, दस्त, पीलिया और टायफाइड जैसी बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक तंत्र और जल संस्थान की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत के हस्तक्षेप के बाद प्रभावित इलाकों से 24 और नए जल सैंपल एकत्र किए गए हैं, जिन्हें विस्तृत और निष्पक्ष जांच के लिए थर्ड पार्टी लैब में भेजा गया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से रिसाव के कारण दूषित पानी पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन में मिल गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई महीने पहले ही नलों में बदबूदार पानी आने की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे अनदेखा कर दिया, जिसके कारण स्थिति इतनी भयावह हो गई।
फिलहाल प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जलापूर्ति रोक दी गई है और लोगों को टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव में शिविर लगाकर मरीजों की स्क्रीनिंग और इलाज कर रही हैं। उच्च न्यायालय के सख्त रुख के बाद प्रशासन पूरी तरह हरकत में आया है और प्रभावितों की देखभाल सुनिश्चित करने के साथ-साथ आपूर्ति तंत्र को दुरुस्त करने के प्रयास जारी हैं।