बिना ‘जियो-टैगिंग’ नहीं बनेगा घर: उत्तराखंड में PM आवास 2.0 के तहत 1647 मकान मंजूर
देवभूमि के शहरी गरीबों को मिलेगी पक्की छत; पारदर्शिता के लिए जियो-टैगिंग अनिवार्य, राज्य सरकार ने निर्माण कार्य जल्द शुरू करने के दिए निर्देश।

देहरादून: उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले बेघर और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 (शहरी) के अंतर्गत उत्तराखंड के लिए 1,647 नए पक्के आवासों को मंजूरी दे दी है। इस सौगात के बाद प्रदेश के सैकड़ों पात्र परिवारों का अपना पक्का घर होने का सपना अब जल्द ही साकार होने जा रहा है। योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों को सुरक्षित, टिकाऊ और सर्वसुविधा युक्त छत उपलब्ध कराना है।
उत्तराखंड के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग (DIPR) और आवास विभाग के अनुसार, इस बार योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता को सर्वोपरि रखा गया है। योजना के तहत स्वीकृत सभी मकानों के निर्माण में ‘जियो-टैगिंग’ (Geo-tagging) को अनिवार्य किया गया है। इसके तहत निर्माण के हर चरण—जैसे नींव डालने से लेकर छत ढलने तक—की जियो-टैग फोटो और लोकेशन अपलोड होने के बाद ही आगे की वित्तीय मदद जारी की जाएगी। बिना जियो-टैगिंग के कोई भी निर्माण मान्य नहीं होगा, जिससे योजना में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी।
राज्य सरकार ने सभी संबंधित एजेंसियों और कार्यदायी संस्थाओं को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि स्वीकृत किए गए इन नए आवासों के निर्माण की प्रक्रिया को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द धरातल पर शुरू किया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि तय गुणवत्ता और समय-सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर गरीब परिवारों को उनके अपने पक्के आशियाने की चाबी जल्द सौंप दी जाए।