असम के भूमि अधिकार कार्यकर्ता की रिहाई की मांग: केन्या में जुटे 7 महाद्वीपों के 26 आदिवासी समुदाय
काजीरंगा में लक्जरी होटल प्रोजेक्ट के विरोध और स्थानीय लोगों के हक के समर्थन में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गूंजी आवाज

असम: असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से जुड़ा भूमि अधिकार और संरक्षण का मुद्दा अब वैश्विक पटल पर आ पहुंचा है। अफ्रीका के देश केन्या में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर के सात महाद्वीपों से आए 26 आदिवासी और मूल निवासी समुदायों के प्रतिनिधियों ने एक साथ मिलकर अपनी आवाज बुलंद की। इन प्रतिनिधियों ने असम के प्रमुख भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले की तत्काल रिहाई की मांग की और काजीरंगा क्षेत्र के प्रभावित स्थानीय परिवारों के साथ एकजुटता जताई।
पूरा विवाद काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित इंगले पाथर क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक बड़ी लक्जरी होटल परियोजना का निर्माण प्रस्तावित है। स्थानीय आदिवासी और मूल निवासी परिवारों का दावा है कि वे पीढ़ियों से इस भूमि का उपयोग अपनी आजीविका और खेती के लिए करते आ रहे हैं। इस परियोजना के विरोध के दौरान ‘ग्रेटर काजीरंगा भूमि एवं मानवाधिकार संरक्षण समिति’ के संयोजक को प्रशासन द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था, जिसके बाद से यह मामला गर्माया हुआ है।
केन्या में जुटे अंतरराष्ट्रीय आदिवासी प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि किसी भी विकास परियोजना की शुरुआत से पहले स्थानीय समुदायों की सहमति और उनके पारंपरिक अधिकारों का सम्मान किया जाना अनिवार्य है। इस वैश्विक समर्थन के बाद काजीरंगा का यह भूमि विवाद अब केवल एक स्थानीय मुद्दा न रहकर मूल निवासियों के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है।