उत्तराखंड हाईकोर्ट से ट्रेनी वन अधिकारी को बड़ी राहत: कारण बताओ नोटिस पर 3 हफ्ते में फैसला लेने के निर्देश
प्रशिक्षण अकादमी के फैसले में देरी पर अदालत सख्त, निर्णय होने तक सेवा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने का दिया आदेश

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून स्थित केंद्रीय राज्य वन सेवा अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही एक ट्रेनी सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) को बड़ी राहत दी है। कारण बताओ नोटिस का समय पर जवाब देने के बावजूद अकादमी प्रशासन द्वारा कोई अंतिम निर्णय न लिए जाने के मामले में अदालत ने सुनवाई करते हुए सक्षम अधिकारी को तीन सप्ताह के भीतर नियमानुसार फैसला करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्णय लेने की इस प्रक्रिया के दौरान अधिकारी की सेवाओं और करियर पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
उड़ीसा लोक सेवा आयोग से चयनित होकर यह अधिकारी अपनी अनिवार्य ट्रेनिंग के लिए देहरादून स्थित वन सेवा अकादमी में तैनात थी। प्रशिक्षण अवधि के दौरान अकादमी प्रबंधन द्वारा उन्हें अलग-अलग समय पर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। संबंधित ट्रेनी अधिकारी ने निर्धारित समयसीमा के अंदर इन सभी नोटिसों के विस्तृत जवाब भी दाखिल कर दिए थे। हालांकि, लंबे समय तक इन जवाबों पर अकादमी स्तर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया, जिससे प्रशिक्षण प्रक्रिया में असमंजस की स्थिति बन गई।
अकादमी द्वारा फैसला लंबित रखे जाने के कारण ट्रेनी अधिकारी को कई प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। उन्हें फैसला आने तक वापस अपने गृह राज्य जाने को कह दिया गया, जिससे वे न केवल मध्यावधि परीक्षाओं में शामिल होने से वंचित रह गईं, बल्कि महत्वपूर्ण अध्ययन यात्रा में भी भाग नहीं ले सकीं। इन बंदिशों के कारण उनके शैक्षणिक मूल्यांकन और करियर पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका खड़ी हो गई थी, जिसके चलते अदालत का दरवाजा खटखटाया गया।
मामले की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक पक्ष को जल्द प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने अकादमी प्रशासन को तीन सप्ताह के भीतर प्रकरण में न्यायसंगत निर्णय लेने को कहा है। इसके साथ ही यह सुरक्षात्मक आदेश भी जारी किया है कि फैसला आने तक लगने वाले समय की वजह से ट्रेनी अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड या भविष्य के प्रशासनिक हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।