उत्तराखण्ड बना देश का पूर्ण साक्षर राज्य
उल्लास पर्व’ के अवसर पर नवसाक्षरों एवं स्वयंसेवी शिक्षकों का सम्मान

देहरादून। उत्तराखण्ड ने साक्षरता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए स्वयं को ’’पूर्ण साक्षर राज्य’’ घोषित किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में आज मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास, देहरादून में ’’‘उल्लास पर्व’’’ के अंतर्गत राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता एवं माननीय सहकारिता, उच्च शिक्षा, संस्कृत शिक्षा एवं विद्यालयी शिक्षा मंत्री के संरक्षण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में माननीय विधायक कैंट सविता कपूर, अपर सचिव, भारत सरकार अर्चना अवस्थी, सचिव विद्यालयी शिक्षा उत्तराखण्ड ज्योति यादव, अपर सचिव विद्यालयी शिक्षा, नमामि बंसल, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा/अपर राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा, उप राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा सहित विद्यालयी शिक्षा विभाग, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद तथा समग्र शिक्षा के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। राज्य के विभिन्न जनपदों से जनपदीय एवं विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी, जिला समन्वयक, नवसाक्षर तथा स्वयंसेवी शिक्षक भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रतिभागियों द्वारा ’’वन्दे मातरम् एवं राष्ट्रगान’’ के सामूहिक गायन से किया गया। इस अवसर पर सचिव विद्यालयी शिक्षा द्वारा मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, भारत सरकार के विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अपर सचिव, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक तथा उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित सभी नवसाक्षरों एवं स्वयंसेवी शिक्षकों का अभिनन्दन किया गया।

सचिव विद्यालयी शिक्षा ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखण्ड का पूर्ण साक्षर राज्य बनना राज्य के लिए गौरव का विषय है। इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन, शिक्षा मंत्री के नेतृत्व एवं दिशा-निर्देशन, भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए वित्तीय संसाधनों एवं मार्गदर्शन, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा तैयार की गई रूपरेखा एवं पाठ्यक्रम तथा विभागीय अधिकारियों, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, समग्र शिक्षा, जनपद एवं विकासखण्ड स्तर के अधिकारियों, समन्वयकों और स्वयंसेवी शिक्षकों के अथक प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम में जनपद ऊधम सिंह नगर के नवसाक्षरों द्वारा ’’‘देश में चमक गया उत्तराखण्ड, पूर्ण साक्षर बन गया उत्तराखण्ड’’’ शीर्षक साक्षरता गीत प्रस्तुत किया गया। जनपद रुद्रप्रयाग की नवसाक्षर श रामप्यारी ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि जनपद चम्पावत की स्वयंसेविका मधु कालोनी ने उल्लास कार्यक्रम के संचालन से जुड़े अपने अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा तैयार लघु फिल्म के माध्यम से भी उल्लास कार्यक्रम की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया।

भारत सरकार की अपर सचिव ने उत्तराखण्ड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने पर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, सचिव विद्यालयी शिक्षा, विभागीय अधिकारियों, नवसाक्षरों एवं स्वयंसेवी शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ऐसे कार्यक्रमों को आगे चरणबद्ध रूप से पूरा करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने नवसाक्षरों को साक्षरता के अगले चरण से जोड़ते हुए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के माध्यम से कक्षा 2 से 5 तक की शिक्षा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया

शिक्षा मंत्री, उत्तराखण्ड सरकार ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में भारत सरकार द्वारा प्रारम्भ किए गए जन-जन साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 25 हजार लोगों की सहभागिता रही और राज्य ने निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड आगामी 6 माह में 100 प्रतिशत साक्षरता की दिशा में और अधिक सुदृढ़ उपलब्धि हासिल करेगा। नवसाक्षरों को कक्षा 2 से 5 तक की शिक्षा से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें विभिन्न कौशल विकास योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सतत विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है तथा राज्य के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित की गई हैंकृ’’100 प्रतिशत पूर्ण साक्षरता, विद्यालयी शिक्षा में ड्रॉपआउट को शून्य करना तथा वर्ष 2035 तक माध्यमिक शिक्षा के बाद कम से कम 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ना।’’ राज्य द्वारा उच्च शिक्षा से संबंधित निर्धारित लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समय से पूर्व प्राप्त किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में उत्तराखण्ड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने को प्रदेश के लिए गौरव और ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने नवसाक्षरों, स्वयंसेवी शिक्षकों तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई एवं धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं विषम परिस्थितियों के बावजूद राज्य ने साक्षरता के क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण लक्ष्य प्राप्त किया है और यह दिन प्रदेश के लिए विशेष गौरव का दिन है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ’’“एक सोच, एक विचार”’’ के साथ आगे बढ़ते हुए नवसाक्षरों को शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास एवं तकनीकी ज्ञान से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है तथा किसी भी व्यक्ति को शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। विद्यालयों को सुदृढ़ बनाने, विद्यार्थियों की शिक्षा निरंतरता सुनिश्चित करने तथा वंचित एवं जरूरतमंद बच्चों को बेहतर शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उत्तराखण्ड का पूर्ण साक्षर राज्य बनना राज्य सरकार, शिक्षा विभाग, नवसाक्षरों, स्वयंसेवी शिक्षकों तथा प्रदेश की जनता के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। यह उपलब्धि प्रदेश में शिक्षा के विस्तार, सामाजिक जागरूकता तथा सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
कार्यक्रम के अंत में अपर सचिव विद्यालयी शिक्षा नमामि बंसल द्वारा मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, विधायक, सचिव विद्यालयी शिक्षा तथा सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, प्रोफेशनल, सीमेट द्वारा किया गया।