
मसूरी में करीब 12 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर शरदोत्सव की रौनक लौट आई है। मंगलवार को सर्वे मैदान से भव्य शोभायात्रा के साथ पांच दिवसीय उत्सव का आगाज हुआ। खराब मौसम और लगातार बारिश के बावजूद कलाकारों, स्थानीय लोगों और पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर मालरोड का माहौल रंगीन बना दिया।
शोभायात्रा सर्वे मैदान से शुरू होकर मालरोड होते हुए गांधी चौक तक पहुंची। रास्तेभर बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग कलाकारों की प्रस्तुतियां देखने के लिए मौजूद रहे। विभिन्न राज्यों की झांकियों और लोककलाओं ने भारत की सांस्कृतिक विविधता की झलक पेश की।
इस दौरान उत्तराखंड की संस्कृति और विरासत पर आधारित झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। महात्मा गांधी और उत्तराखंड के जननायक इंद्रमणि बडोनी के जीवन एवं विचारों को दर्शाती झांकी ने लोगों का विशेष ध्यान खींचा।
मौसम खराब होने के कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मसूरी दौरा रद्द हो गया। उनके कार्यक्रम में शामिल नहीं होने से आयोजकों और लोगों को थोड़ी निराशा जरूर हुई, लेकिन उत्सव की गतिविधियां जारी रहीं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने संयुक्त रूप से शरदोत्सव का शुभारंभ किया।
नगर पालिका के अनुसार इस बार स्थानीय कलाकारों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। करीब 80 प्रतिशत अवसर स्थानीय प्रतिभाओं को दिए गए हैं। आयोजन में लोककला, पारंपरिक परिधान, पहाड़ी खानपान और स्थानीय उत्पादों को भी प्रमुखता दी जा रही है।
पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ फूड फेस्टिवल भी आयोजित होगा। पहाड़ी व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों के जरिए पर्यटन के साथ स्थानीय कारोबार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। लंबे समय बाद शरदोत्सव की वापसी ने मसूरी को फिर से संस्कृति और पर्यटन के रंग में रंग दिया है।