
चमोली: उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल चोपता और तृतीय केदार तुंगनाथ को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है। क्षेत्र में बढ़ते कचरे और प्लास्टिक से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग ने व्यापक सफाई अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत क्षेत्र में 100 स्वच्छता अभियान आयोजित किए जाएंगे। साथ ही पर्यटकों और श्रद्धालुओं के प्लास्टिक लेकर पहुंचने पर रोक लगाने की व्यवस्था भी तैयार की जा रही है।
वन विभाग के अभियान के तहत अब तक करीब पांच हजार किलोग्राम कचरा एकत्र किया जा चुका है। इस मुहिम में स्थानीय निवासियों और स्वयं सहायता समूहों को भी शामिल किया गया है, ताकि पर्यटन क्षेत्र को साफ रखने के प्रयासों को लगातार आगे बढ़ाया जा सके।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या से बढ़ी चुनौती
समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर धार्मिक आस्था के साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। हालांकि, पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के साथ प्लास्टिक और अन्य कचरे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। इससे हिमालयी क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
जागरूकता के साथ सख्त व्यवस्था की तैयारी
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ रजत सुमन ने बताया कि तुंगनाथ और चोपता क्षेत्र में नियमित रूप से सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए सूचना बोर्ड लगाए जा रहे हैं और जागरूकता रैलियां भी निकाली जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में प्लास्टिक की आवाजाही रोकने के लिए व्यवस्था लागू करने की योजना है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाना और कचरे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण करना है।
वन विभाग की इस पहल से उम्मीद है कि चोपता और तुंगनाथ की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही स्थानीय लोगों और पर्यटकों की भागीदारी से क्षेत्र को स्वच्छ बनाए रखने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।