
बच्चों में पढ़ने-लिखने की रुचि विकसित करने और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से दून लाइब्रेरी एवं शोध केंद्र में आयोजित पांच दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला के दूसरे दिन विभिन्न रचनात्मक और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की गईं। बच्चों ने नृत्य के साथ पहाड़े सीखे, निबंध लेखन की बारीकियां समझीं और कविता, चुटकुले तथा अन्य रचनाएं तैयार कीं। कार्यशाला में करीब 50 छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं।
अल्मोड़ा से प्रकाशित बाल पत्रिका ‘बालप्रहरी’, भारत ज्ञान विज्ञान समिति और किताब कौतिक आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में लेखन कौशल, कल्पनाशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है।
कार्यशाला के दूसरे दिन की शुरुआत ‘ज्ञान का दिया जलाने’ समूह गीत से हुई। इसके बाद शब्द लेखन, पहाड़ा लेखन, चित्रकला और खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आलिया नूर, अंशिका रावत, तनू चंद, खुशी कुमारी, सरोज कुमार, अभिजीत, अदिति और कनिका को पुरस्कार स्वरूप बाल साहित्य प्रदान किया गया।
बालप्रहरी के संपादक उदय किरौला ने बच्चों को निबंध लेखन की बारीकियां सिखाईं। उन्होंने पेन विषय पर निबंध लिखने का उदाहरण देते हुए उसकी पृष्ठभूमि, प्रकार, भाग, लाभ, नुकसान और उपसंहार के आधार पर विषय को क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत करना समझाया।
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, राजपुर रोड की शिक्षिका कुसुम वर्तवाल ने बच्चों से ‘बच्चे’, ‘फूल’, ‘बादल’, ‘हमारा श्रीनगर’, ‘भोजन की बर्बादी’, ‘बेटी बचाओ’, ‘कूड़ादान’ और ‘बेटियां नहीं हैं कम’ जैसे विषयों पर कविताएं तैयार कराईं। बच्चों ने दिए गए शब्दों के आधार पर अपनी कल्पनाओं को कविता का रूप दिया।
कार्यशाला में ‘नेताजी की खोज’, ‘तोता कहता है’, ‘जैसा मैं कहूं’, ‘कितने भाई कितने’, ‘कितना बड़ा पहाड़’ और ‘पिज्जा हट’ जैसे खेल भी कराए गए। बाल कवि सम्मेलन, नुक्कड़ नाटक और समूह गीत के माध्यम से बच्चों को सामूहिक सहभागिता और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने का अवसर मिला।
बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर जोर
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के अंबरीश बिष्ट ने कहा कि विज्ञान के इस दौर में भी समाज में कई अंधविश्वास और कुरीतियां मौजूद हैं। इन्हें दूर करने के लिए बच्चों में बचपन से ही वैज्ञानिक सोच विकसित करना जरूरी है।
भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रांतीय अध्यक्ष विजय भट्ट ने कहा कि घरों में रोजमर्रा के कामों के दौरान विज्ञान के अनेक प्रयोग होते हैं, लेकिन बच्चे अक्सर विज्ञान को केवल प्रयोगशाला तक सीमित विषय समझते हैं। उन्होंने विभिन्न खेलों और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को विज्ञान की सरलता और उपयोगिता समझाई।
अपनी हस्तलिखित पुस्तक तैयार कर रहे बच्चे
कार्यशाला की प्रमुख गतिविधियों में बच्चों की अपनी हस्तलिखित पुस्तक तैयार करना शामिल है। इसके तहत बच्चे ‘मेरा परिचय’, ‘मेरा स्कूल’, ‘मेरी दिनचर्या’, ‘एक दिन की बात है’ और चुटकुले जैसे विषयों पर सामग्री लिख रहे हैं। इस पहल के माध्यम से बच्चों को अपनी कल्पनाओं, अनुभवों और विचारों को लिखित रूप में व्यक्त करने का अवसर मिल रहा है।
बालप्रहरी संपादक उदय किरौला, किताब कौतिक अभियान से जुड़े हेम पंत और वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाशचंद्र पांडे सहित अन्य संदर्भदाताओं ने अलग-अलग समूहों में बच्चों का मार्गदर्शन किया।
23 से 25 अक्टूबर तक होगा देहरादून किताब कौतिक
बच्चों में पुस्तक संस्कृति और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने की इस पहल के बीच देहरादून में आगामी किताब कौतिक भी खास महत्व रखता है। क्रिएटिव उत्तराखंड की ओर से 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में तीन दिवसीय देहरादून किताब कौतिक आयोजित किया जाएगा। यह अभियान का 16वां किताब कौतिक है।
आयोजन की घोषित योजना के अनुसार, पुस्तक मेले में करीब 75 प्रकाशकों की लगभग 80 हजार पुस्तकें पाठकों के लिए उपलब्ध होंगी। इस पहल का उद्देश्य पाठकों, लेखकों, प्रकाशकों और साहित्य प्रेमियों को एक मंच पर लाने के साथ बच्चों और युवाओं में पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ाना है।
बाल लेखन कार्यशाला में तैयार हो रही बच्चों की हस्तलिखित पुस्तकें भी इस पहल से विशेष रूप से जुड़ती हैं। बच्चों को अपनी रचनाएं तैयार करने और उन्हें पाठकों तक पहुंचाने का अवसर मिलना लेखन के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यशाला में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, राजपुर रोड, सनातन धर्म इंटर कॉलेज, राजकीय जूनियर हाईस्कूल परेड ग्राउंड और सीएनआई गर्ल्स इंटर कॉलेज के करीब 50 छात्र-छात्राएं प्रतिभाग कर रहे हैं। इस अवसर पर अंबरीश बिष्ट, हेम पंत, विजय भट्ट, अदिति जमलोकी, सुमन सेमवाल, कुसुम वर्तवाल और अनीता अंथवाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।