उत्तराखंड में 18 हजार फीट की ऊंचाई से शुरू होगी 100 मील की रेस! माणा पास से औली तक दौड़ेंगे एथलीट

देहरादून: उत्तराखंड के हिमालयी सीमांत क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए अब एक अनोखी खेल प्रतियोगिता आयोजित करने की तैयारी है। राज्य में माणा पास से औली तक करीब 100 मील यानी 161 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन कराने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्तावित दौड़ समुद्र तल से करीब 5,638.8 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आयोजन के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी है, जिसके बाद पर्यटन विभाग इसकी रूपरेखा तैयार करने में जुटा है।
योजना के मुताबिक, दौड़ की शुरुआत माणा पास से होगी और इसका समापन औली में प्रस्तावित है। इस दौरान धावकों को ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, कठिन पहाड़ी रास्तों और बदलते मौसम जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आयोजन का उद्देश्य उत्तराखंड को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय एडवेंचर स्पोर्ट्स के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना भी है।
सीमांत गांवों में पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस आयोजन की योजना तैयार की जा रही है। इसके जरिए सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाएं बढ़ाने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जाएगा।
यदि यह प्रतियोगिता प्रस्तावित स्वरूप में आयोजित होती है, तो देश-विदेश से धावकों के साथ उनके प्रशिक्षक, सहयोगी और पर्यटक भी क्षेत्र में पहुंच सकते हैं। इससे स्थानीय होमस्टे, होटल, परिवहन और खानपान से जुड़े कारोबार को लाभ मिलने की संभावना है। स्थानीय युवाओं को गाइड और आयोजन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी अवसर मिल सकते हैं।
हालांकि, इतनी ऊंचाई पर लंबी दूरी की दौड़ आयोजित करना आसान नहीं होगा। इसके लिए सुरक्षित रूट, चिकित्सा सुविधाएं, आपातकालीन बचाव व्यवस्था और मौसम संबंधी तैयारियां जरूरी होंगी। आयोजन की तारीख और पंजीकरण से जुड़ी जानकारी अभी तय होनी बाकी है।
आदि कैलाश रन की सफलता के बाद नई पहल
हाल ही में पिथौरागढ़ में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 में करीब 1,100 एथलीटों ने हिस्सा लिया था। इस प्रतियोगिता में 70 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन के पुरुष वर्ग में दिगंबर सिंह कुंवर और महिला वर्ग में मीनाक्षी नेगी विजेता रहे।
दिगंबर सिंह कुंवर ने माणा पास में प्रस्तावित दौड़ को युवाओं के लिए अच्छा अवसर बताते हुए कहा कि इससे दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में पर्यटन और स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।
फिलहाल पर्यटन विभाग आयोजन की व्यावहारिकता और जरूरी व्यवस्थाओं पर काम कर रहा है। योजना सफल होती है तो माणा पास से औली तक की यह चुनौतीपूर्ण दौड़ उत्तराखंड में एडवेंचर टूरिज्म को नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन सकती है।