पिथौरागढ़ की व्यास घाटी में लचर संचार और बिजली व्यवस्था: भारतीय नेटवर्क को तरस रहे सीमांत गांवों के लोग, मजबूरी में उपयोग कर रहे नेपाली सिम
आदि कैलाश और ओम पर्वत जाने वाले पर्यटकों व स्थानीय ग्रामीणों को हो रही भारी फजीहत; बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र
पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है। सीमांत क्षेत्र के गुंजी, नाभी, कुटी और रौंगकोंग समेत कई गांवों में मजबूत मोबाइल नेटवर्क और नियमित बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के न होने से स्थानीय ग्रामीणों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि भारतीय मोबाइल कंपनियों के सिग्नल न मिलने के कारण लोगों को मजबूरी में पड़ोसी देश नेपाल के मोबाइल नेटवर्क और सिम कार्डों का सहारा लेना पड़ रहा है।
संचार और बिजली की भारी किल्लत
डिजिटल युग और आधुनिकता के दावों के बीच व्यास घाटी के सीमांत गांवों के लोग आज भी संपर्क साधने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। क्षेत्र में हालांकि कुछ स्थानों पर जियो और बीएसएनएल के टॉवर लगाए गए हैं, लेकिन बिजली की निर्बाध आपूर्ति न होने और तकनीकी दिक्कतों के चलते वे अक्सर ठप या बेहद कमजोर स्थिति में रहते हैं। सामान्य फोन कॉल करने या इंटरनेट का उपयोग करने के लिए ग्रामीणों और पर्यटकों को ऊंची पहाड़ियों या निश्चित स्थानों पर भटकना पड़ता है। आपातकालीन स्थितियों, स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतों या प्राकृतिक आपदा के समय अपनों तक सूचना पहुंचाना भी यहाँ एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पर्यटन कारोबार पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आदि कैलाश, पार्वती कुंड और ओम पर्वत के दर्शन के लिए व्यास वैली का रुख करते हैं। लेकिन मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की सुविधा न मिलने के कारण पर्यटकों को अपने परिजनों से संपर्क करने में भारी असुविधा होती है। डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की सुविधा ठप रहने से यात्रा से जुड़े स्थानीय पर्यटन कारोबारियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने लंबे समय से क्षेत्र में भारतीय दूरसंचार सेवाओं को सुदृढ़ करने और बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग उठाई है। इस संबंध में संबंधित विभागों के अधिकारियों का कहना है कि सीमांत क्षेत्र में ऊर्जा विभाग द्वारा ग्रिड लाइन बिछाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द सभी गांवों को नियमित बिजली से जोड़ा जा सके। इसके साथ ही, कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में बीएसएनएल और अन्य ऑपरेटरों की सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि देश के इस सीमांत हिस्से में नागरिकों और पर्यटकों को आधुनिक संचार सुविधाओं का पूरा लाभ मिल सके।