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उत्तराखंड में “नोटेड कार्पेट” उद्योग को मिलेगा नया विस्तार

राज्यमंत्री वीरेन्द्र दत्त सेमवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखी भविष्य की कार्ययोजना

उत्तराखंड हाथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के माननीय राज्यमंत्री (उपाध्यक्ष) श्री वीरेन्द्र दत्त सेमवाल जी ने रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तराखंड में “नोटेड कार्पेट” एवं हथकरघा उद्योग को लेकर भविष्य की योजनाओं और संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी।

 

उन्होंने बताया कि भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अधिकारियों के साथ “नोटेड कार्पेट” एवं हथकरघा उद्योग की संभावनाओं को लेकर महत्वपूर्ण बैठक पूर्व में आयोजित की जा चुकी है, जिसमें उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में इस क्षेत्र को विकसित करने तथा स्थानीय शिल्पकारों को रोजगार से जोड़ने पर गंभीर चर्चा हुई थी।

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए  वीरेन्द्र दत्त सेमवाल जी ने कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा विश्वभर में अपनी उत्कृष्ट बुनकरी और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध रही है। उन्होंने कहा, “एक दौर वह भी था जब मखमल की साड़ी अंगूठी से होकर निकल जाती थी। हमारे देश की ऐसी गौरवशाली और समृद्ध परंपरा रही है। आज आवश्यकता है कि हम फिर से उस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से कार्य करें।”

 

उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के “वोकल फॉर लोकल” एवं “आत्मनिर्भर भारत” के विजन, उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी जी तथा विभागीय मंत्री  भरत सिंह चौधरी जी के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में जल्द ही भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के माध्यम से उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में “नोटेड कार्पेट” के क्षेत्र में कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

 

राज्यमंत्री श्री सेमवाल जी ने कहा कि प्रदेश में जिला आधारित केन्द्रों के माध्यम से हथकरघा एवं कार्पेट उद्योग को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत स्थानीय युवाओं, महिलाओं एवं शिल्पकारों को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ-साथ उत्तराखंड के हस्तशिल्प उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

 

उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आने वाले समय में इस क्षेत्र के विस्तार के लिए नए केन्द्र खोलने पर भी विचार किया जा सकता है। इस विषय को लेकर शीघ्र ही माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के साथ विस्तृत वार्ता कर आगे की रूपरेखा स्पष्ट की जाएगी।

 

इस अवसर पर भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के अध्यक्ष श्री अनिल चंदोला जी एवं गोदाम्बरी हैंडलूम के स्वामी श्री सुशील नौटियाल जी भी उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने उत्तराखंड की पारंपरिक बुनकरी एवं हस्तशिल्प कला को नई पहचान दिलाने की दिशा में सरकार की पहल को सराहनीय बताया।

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस को उत्तराखंड में हथकरघा एवं हस्तशिल्प उद्योग के लिए एक सकारात्मक और दूरदर्शी पहल माना जा रहा है, जिससे प्रदेश के कारीगरों और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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