उत्तराखंड

उत्तराखंड में तैयार हुआ धार्मिक शिक्षा का नया पाठ्यक्रम, राष्ट्रवाद से भारतीय इतिहास तक होंगे विषय; जानें पूरी योजना

देहरादून: उत्तराखंड में अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए धार्मिक शिक्षा का नया पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसमें धार्मिक मान्यताओं के साथ भारतीय इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुड़े विषयों को भी शामिल किया गया है। कक्षा 1 से 8 तक का पाठ्यक्रम पहले तैयार किया जा चुका है, जबकि अब कक्षा 9 से 12 तक के लिए भी प्रारूप तैयार कर लिया गया है। हालांकि, इसे लागू करने से पहले शिक्षा विभाग की मंजूरी मिलना बाकी है।

धार्मिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति की जानकारी

प्रस्तावित पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को धर्म और धार्मिक परंपराओं की जानकारी देने के साथ देश की ऐतिहासिक विरासत से भी परिचित कराया जाएगा। इसमें भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और देश की आजादी में योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित विषय शामिल किए गए हैं।

इस पहल का उद्देश्य धार्मिक शिक्षा के दायरे में भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े पहलुओं को भी स्थान देना है। पाठ्यक्रम को मंजूरी मिलने के बाद इसके संचालन से संबंधित व्यवस्थाएं स्पष्ट होंगी।

कक्षा 1 से 12 तक के लिए तैयार किया गया प्रारूप

उत्तराखंड में धार्मिक शिक्षा के लिए शुरुआती आठ कक्षाओं का पाठ्यक्रम पहले ही तैयार किया जा चुका है। अब माध्यमिक स्तर यानी कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए भी पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार कर लिया गया है।

अगले चरण में इसे शिक्षा विभाग के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा। विभाग की स्वीकृति मिलने के बाद ही इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

परीक्षा के बाद प्रमाणपत्र देने की योजना

इस प्रस्ताव की एक प्रमुख विशेषता परीक्षा और प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था है। उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की ओर से पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षा आयोजित करने और विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र देने की योजना बनाई गई है।

हालांकि, इन प्रमाणपत्रों की मान्यता, उपयोग और उनसे जुड़ी शर्तों के बारे में विस्तृत जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।

विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक होगी धार्मिक शिक्षा

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, धार्मिक शिक्षा विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य नहीं होगी। छात्र अपनी इच्छा के अनुसार इसका चयन कर सकेंगे। नियमित पढ़ाई के पहले या बाद में धार्मिक शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

मंजूरी का इंतजार: प्राधिकरण अध्यक्ष

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USMEA) के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक, धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार है और अब शिक्षा विभाग की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मंजूरी मिलने के बाद उत्तराखंड इस तरह का धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम तैयार करने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है।

फिलहाल इस योजना को लागू करने की दिशा में अगला कदम शिक्षा विभाग की स्वीकृति है। इसके बाद ही पाठ्यक्रम के संचालन, परीक्षा और प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़ी अंतिम व्यवस्था स्पष्ट हो सकेगी।

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