
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने गुरुवार को लोकसभा में स्पष्ट किया कि आगामी परिसीमन के बाद लोकसभा की कुल सदस्य संख्या को बढ़ाकर 815 कर दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था में 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
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सीटों का गणित: ‘नुकसान किसी को नहीं’
कानून मंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि सीटों की संख्या में यह वृद्धि एक सरल सूत्र पर आधारित है। वर्तमान लोकसभा सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बदलाव से न तो किसी राज्य को अपनी सीटों का नुकसान होगा और न ही पुरुष प्रतिनिधियों के अवसरों में कमी आएगी।
”महिला आरक्षण लागू होने के बाद किसी भी राज्य को सीटों का नुकसान नहीं होगा। यह सुधार संतुलन बनाए रखते हुए महिलाओं को उनका उचित अधिकार दिलाने के लिए है।” – अर्जुन राम मेघवाल, कानून मंत्री
आरक्षण के भीतर आरक्षण और जनगणना का पेच
विधेयक की बारीकियों पर चर्चा करते हुए मंत्री ने बताया कि महिलाओं के लिए निर्धारित 33 प्रतिशत कोटे के भीतर ही अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणियों की महिलाओं के लिए भी आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान संशोधन विधेयक लाना क्यों आवश्यक था। मेघवाल ने कहा कि यदि 2023 का अधिनियम अपने पुराने स्वरूप में रहता, तो 2029 में इसे लागू करना संभव नहीं होता, क्योंकि यह 2026 के बाद आने वाले जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर है। नए विधेयकों के माध्यम से इस प्रक्रिया को सुगम बनाया गया है।
वैश्विक संदर्भ में भारत का नेतृत्व
कानून मंत्री ने ऐतिहासिक तुलना करते हुए कहा कि भारत में महिलाओं को समान मताधिकार शुरू से प्राप्त है, जबकि दुनिया के कई विकसित देशों में इसके लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा।
अमेरिका: पुरुषों के 144 साल बाद महिलाओं को वोटिंग का अधिकार मिला। यूनाइटेड किंगडम: 1918 में सशर्त और 1928 में पूर्ण मताधिकार मिला। मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को केवल मतदाता नहीं, बल्कि नीति-निर्धारक बनाना है। परिसीमन आयोग की स्थापना और महिला आरक्षण संशोधन से संबंधित इन तीन विधेयकों को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।