केदारनाथ धाम के कपाट खुले, 51 क्विंटल फूलों से सजा मंदिर; सीएम धामी रहे मौजूद.

केदारनाथ (उत्तराखंड), 22 अप्रैल। हिमालय की गोद में स्थित विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही बाबा केदार के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा और वातावरण भक्ति में सराबोर हो गया।
कपाट खुलने के अवसर पर मंदिर को 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। इस दौरान पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे और उन्होंने मंदिर में पहली पूजा-अर्चना की। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं में इस अवसर पर भारी उत्साह देखने को मिला।
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LIVE: श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर दर्शन-पूजन
https://t.co/9HRJnzOsVu— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) April 22, 2026
11वां ज्योतिर्लिंग है केदारनाथ
केदारनाथ धाम को भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में 11वां ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह उत्तराखंड के चारधामों में प्रमुख स्थान रखता है और पंच केदार में प्रथम केदार के रूप में पूजित है। यहां मुख्य गर्भगृह में त्रिकोणीय आकार का शिवलिंग स्थापित है, जिसे ‘केदारेश्वर’ के रूप में पूजा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में पांडव गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए यहां आए थे। भगवान शिव ने उन्हें महिष (भैंसे) के रूप में दर्शन दिए, जिसके बाद यहां ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई।
पारंपरिक विधियों से हुआ कपाट उद्घाटन
कपाट खुलने से पहले शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से बाबा केदार की पंचमुखी डोली केदारनाथ पहुंची। इसके बाद विशेष पूजा-अर्चना, हवन, यज्ञ और अभिषेक किया गया।
मुख्य पुजारी (रावल) और हक-हकूकधारियों की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच मंदिर के द्वार खोले गए। इसके पश्चात पहली आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती पर आज श्री केदारनाथ धाम के कपाट पूरे विधि-विधान के साथ हम सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं।
केदारनाथ धाम और चारधाम की यह यात्रा हमारी आस्था, एकता और समृद्ध परंपराओं का दिव्य उत्सव है। इन यात्राओं से हमें भारत की सनातन संस्कृति के दर्शन भी… pic.twitter.com/BYQItBsZi4
— Narendra Modi (@narendramodi) April 22, 2026
‘नर’ और ‘देव’ पूजा की परंपरा
केदारनाथ धाम में छह माह ‘नर पूजा’ और छह माह ‘देव पूजा’ की परंपरा प्रचलित है। ग्रीष्मकाल में कपाट खुले रहने के दौरान श्रद्धालु स्वयं पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि शीतकाल में कपाट बंद रहने पर देवताओं द्वारा पूजा किए जाने की मान्यता है।
2013 आपदा के बाद बदली तस्वीर
2013 केदारनाथ आपदा के बाद क्षेत्र में व्यापक पुनर्निर्माण और विकास कार्य किए गए हैं। बेहतर सड़क, पैदल मार्ग, हेलीकॉप्टर सेवाओं और सुरक्षा प्रबंधों ने यात्रा को पहले की तुलना में अधिक सुगम और सुरक्षित बना दिया है।
बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, मजबूत होती अर्थव्यवस्था
पिछले कुछ वर्षों में केदारनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं और राज्य के पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है।
भुकुंट भैरव की विशेष मान्यता
केदारनाथ धाम में भुकुंट भैरव को क्षेत्ररक्षक देवता माना जाता है। मान्यता है कि शीतकाल में जब कपाट बंद रहते हैं, तब भैरव बाबा ही केदारपुरी की रक्षा करते हैं। श्रद्धालु केदारनाथ दर्शन के साथ भैरव मंदिर में पूजा करना भी आवश्यक मानते हैं।
कल खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, जब गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले गए थे। केदारनाथ के कपाट खुलने के बाद अब गुरुवार को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे, जिसके साथ ही चारधाम यात्रा पूर्ण रूप से शुरू हो जाएगी।