उत्तराखंडदेहरादून

देहरादून: कांग्रेस विधायक ने विधानसभा गेट पर पलटी गन्ने से भरी ट्रॉली, ₹110 करोड़ बकाया भुगतान को लेकर प्रदर्शन.

देहरादून में महिला आरक्षण पर बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र से पहले मंगलवार को विधानसभा परिसर के बाहर उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब झबरेड़ा से कांग्रेस विधायक वीरेन्द्र कुमार जाती ने गन्ने से भरी ट्रॉली पलटकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया।

देहरादून: कांग्रेस विधायक ने विधानसभा गेट पर पलटी गन्ने से भरी ट्रॉली, ₹110 करोड़ बकाया भुगतान को लेकर प्रदर्शन

दरअसल, उत्तराखंड विधानसभा में नारी सम्मान और लोकतंत्र में महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा के लिए एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया था। लेकिन सत्र शुरू होने से पहले ही विधानसभा गेट के बाहर विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विधायक वीरेन्द्र जाती गन्ने से लदी ट्रॉली लेकर विधानसभा पहुंचे और मुख्य गेट के सामने ट्रॉली को पलट दिया। देखते ही देखते सड़क पर गन्ना फैल गया, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और आवागमन प्रभावित हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करते हुए ट्रॉली हटाकर रास्ता साफ कराया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान विधायक जाती ने कहा कि उनका उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना नहीं, बल्कि किसानों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इकबालपुर शुगर मिल पर गन्ना किसानों का लगभग 110 करोड़ रुपये बकाया है, जिसका लंबे समय से भुगतान नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा, “हमारा मकसद सुरक्षा तोड़ना नहीं है, बल्कि किसानों की आवाज़ उठाना है। इकबालपुर मिल पर करीब 110 करोड़ रुपये बकाया हैं, किसानों को उनका हक नहीं मिल रहा। मजबूरी में हमें इस तरह का विरोध करना पड़ रहा है, ताकि सरकार जागे और किसानों को उनका भुगतान मिले।”

इस विरोध के चलते कुछ समय के लिए विधानसभा गेट पर यातायात बाधित रहा। पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात कर स्थिति को सामान्य किया।

एक ओर जहां विधानसभा के भीतर महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा चल रही थी, वहीं बाहर किसानों के बकाया भुगतान को लेकर हुए इस विरोध प्रदर्शन ने सियासी माहौल को और गरमा दिया। विपक्ष ने इसे सरकार की नीतियों की विफलता बताया, जबकि सत्तापक्ष ने विरोध के इस तरीके पर सवाल उठाए हैं।

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