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देहरादून में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर बेरोजगार नर्सिंग का धरना जारी , पानी की टंकी पर चढ़ी नर्स 31 घंटे बाद भी नहीं उतरीं

राजधानी देहरादून में अपनी मांगों को लेकर नर्स धरने पर बैठी है, उन्ही में से कुछ नर्स पानी की टंकी पर चढ़ गई थी.

बीते 30 घंटे से अधिक समय से बेरोजगार नर्सिंग अपनी मांगों को लेकर परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी के ऊपर चढ़े हुए हैं, जबकि उनके साथी टंकी के समीप धरने पर बैठे हुए हैं. उनके समर्थन मे टंकी पर चढ़ी महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला नीचे उतरने को तैयार नहीं है.धूप और बारिश की चिंता ना करते हुए प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं है. आज 12 मई को अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस के मौके पर यह नर्सिंग बेरोजगार मांगों का समाधान नहीं होने की सूरत में मायूस नजर आ रहे हैं.

उनका कहना है कि आज सुबह से ही इनको अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस की बधाइयां फोन पर मिल रही हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में वह उन शुभकामनाओं को भी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर का मानना है कि अब तो प्रशासन भी उनके साथ तानाशाही कर रहा है, और अपने साथियों के लिए पानी की टंकी पर खाना पीना भेजने से रोका जा रहा है.उन्होंने कहा कि आज दोपहर एकता मंच के सदस्यों के साथ उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशिका के साथ उनकी एक वार्ता होनी है. अगर वार्ता में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला तो उसके बाद आंदोलन को उग्र करने की रणनीति तैयार की जाएगी.

उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस उन लोगों के लिए है, जिन्हें रोजगार मिल गया है. हमारे लिए तो आज का दिन ब्लैक डे के रूप में है. नवल ने कहा कि नर्सेज सोसायटी का समाज में विशेष स्थान रहा है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डे के दिन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे नर्सिंग अभ्यर्थियों को उपहार स्वरूप वर्ष वार नियुक्ति का तोहफा दिया जाना चाहिए.उन्होंने चेताया कि यदि उनकी मांगों पर कोई निस्तारण नहीं होता है तो ऐसी स्थिति में उनका आंदोलन जारी रहेगा. इधर धरने पर बैठीं मधु उनियाल ने कहा कि उनके फोन पर नर्सेज दिवस की शुभकामनाओं के कई संदेश आ रहे हैं, लेकिन इन स्थितियों में उन शुभकामनाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. उनकी मांगों को दरकिनार किया जा रहा है. 159 दिन से वह वर्ष वार नियुक्ति की मांग को लेकर धरनारत रहे, और आज भी धरना दे रहे हैं. मधु उनियाल ने कहा कि उसके बावजूद सरकार उनकी समस्या का समाधान नहीं कर रही है.

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