
उत्तराखंड जल संस्थान में अभियंताओं के बीच वर्षों से चला आ रहा सीनियरिटी विवाद अब विभागीय कार्यप्रणाली पर भारी पड़ने लगा है। स्थिति यह है कि विभाग में 88 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं और इंजीनियरों की पदोन्नति का मामला अटका हुआ है। वहीं मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) को पांच महाप्रबंधकों (जीएम) का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है।जल संस्थान और पेयजल निगम के बीच विवाद तो पहले से ही चला आ रहा है, लेकिन अब जल संस्थान के भीतर सिविल और विद्युत-यांत्रिक अभियंताओं के बीच सीनियरिटी को लेकर चल रही खींचतान ने पदोन्नति प्रक्रिया को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। इसका असर विभाग के प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों पर भी दिखाई देने लगा है



दरअसल, राज्य गठन के बाद वर्ष 2010 में लोक सेवा आयोग के माध्यम से सिविल तथा विद्युत-यांत्रिक अभियंताओं की भर्ती पृथक-पृथक पदो के सापेक्ष की गई थी। उस समय 24 सिविल और 11 विद्युत-यांत्रिक सहायक अभियंताओं के पद पृथक पृथक अधियाचित हुए । विभाग में तत्समय से वर्तमान तक सिविल एव विद्युत-यांत्रिक अभियंताओं की भर्ती हेतु पृथक-पृथक अधियाचन ही भेजे जाते रहे है, हालांकि सभी पद पद अलग अलग विज्ञापित होते है किंतु संयुक्त वरिष्ठता व प्रोन्नति हेतु दोनों संवर्गों हेतु स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण भर्ती प्रक्रिया के बाद से ही दोनों संवर्गों के बीच सीनियरिटी को लेकर विवाद शुरू हो गया, जो आज तक कायम है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों संवर्गों के कार्यों का स्पष्ट विभाजन नहीं होने के कारण सिविल अभियंताओं को यांत्रिक और यांत्रिक अभियंताओं को सिविल कार्यों की जिम्मेदारी भी दी जाती रही। मामला शासन स्तर पर नहीं सुलझा तो न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।वर्ष 2015, 2017 और 2024 के बाद, हाल ही में जल संस्थान मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शासन को एक नया प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में विभाग के अधिकांश कार्य सिविल संवर्ग के है, वहीं विभाग में सिविल एवं विद्युत/यांत्रिक के अलग अलग भर्ती होने होने का हवाला देते हुए सीनियरिटी निर्धारण और पदों के पुनर्विन्यास की मांग की गई है। हालांकि इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।



वर्तमान में मुख्य महाप्रबंधक मुख्यालय के अलावा टीआरएम, पौड़ी, पिथौरागढ़ और नैनीताल सहित पांच महाप्रबंधकों का अतिरिक्त दायित्व भी संभाल रहे हैं। इसके अलावा देहरादून, पिथौरागढ़, ग्रामीण, नगर, हरिद्वार, पौड़ी, चमोली, नैनीताल और अल्मोड़ा समेत कई मंडलों में अधीक्षण अभियंता (एसई) के पद नियमित नियुक्ति के बजाय केवल प्रभार के आधार पर संचालित किए जा रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासन स्तर पर निर्णय होने के बाद पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। विभागीय अभियंता स्ट्रक्चर में त्रुटि के चलते अभियंता आपसी विवाद में उलझ गए हैं । साथ ही विभागीय सूत्रों के अनुसार शासन को पदों के विभाजन का प्रस्ताव भेजा गया है।