रिहायशी इलाके में दो शावकों के साथ पहुंची मादा गुलदार, वन विभाग ने सुरक्षित किया रेस्क्यू
सीसीटीवी में कैद हुई पूरी घटना, दो घंटे तक दहशत में रहे लोग; वन विभाग ने दोनों शावकों को सुरक्षित पकड़ा, मां से मिलाने की तैयारी

सुबह का समय था और श्रीनगर क्षेत्र के एक रिहायशी इलाके में उस वक्त लोगों में अफरा-तफरी मच गई, जब एक मादा गुलदार अपने दो शावकों के साथ आबादी के बीच पहुंच गई। यह पूरा घटनाक्रम इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गया, जिससे स्थानीय लोगों के दावे भी सही साबित हुए कि पिछले कुछ समय से गुलदार आबादी वाले इलाकों और मुख्य सड़कों के आसपास लगातार नजर आ रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोगों ने शोर मचाकर मादा गुलदार और उसके शावकों को जंगल की ओर भगाने की कोशिश की। इस दौरान मादा गुलदार तो वापस जंगल की ओर चली गई, लेकिन उसके दोनों शावक पीछे रह गए। करीब दो घंटे बाद फिर से शावकों की आवाज सुनाई दी, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जाल की मदद से एक शावक का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। इसी बीच पास के एक घर से एक युवती की चीख सुनाई दी। उसने खिड़की से बाहर मौजूद लोगों को बताया कि दूसरा शावक उसके घर के बरामदे में बैठा हुआ है। शावक को सामने देखकर युवती ने खुद को कमरे में बंद कर लिया।
स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए बरामदे का शटर बंद कर दिया, जिससे शावक बाहर नहीं निकल सका और किसी भी संभावित हादसे से बचाव हो गया। इसके बाद वन विभाग को दोबारा सूचना दी गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर दूसरे शावक का भी सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग से दोनों शावकों को उनकी मां के पास सुरक्षित जंगल में छोड़ने की मांग की। उनका कहना है कि यदि शावकों को लंबे समय तक मां से अलग रखा गया, तो मादा गुलदार उन्हें तलाशते हुए दोबारा रिहायशी क्षेत्र में आ सकती है, जिससे लोगों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।
वार्ड पार्षद जेपी बिष्ट ने कहा कि क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग को नियमित गश्त बढ़ानी चाहिए। साथ ही झाड़ियों की सफाई और वन्यजीवों की लगातार निगरानी भी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दोनों शावकों का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। विभाग मादा गुलदार की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और प्रयास किया जाएगा कि उचित समय पर दोनों शावकों को उनकी मां के आसपास सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया जाए, जिससे वन्यजीवों और स्थानीय लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।