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एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल को राष्ट्रपति मुर्मू की हरी झंडी
संशोधित कानून के तहत पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान किया गया है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही देश में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर कानून और सख्त हो गया है। संशोधित कानून का उद्देश्य पेपर लीक मामलों की त्वरित जांच, शीघ्र सुनवाई और दोषियों को जल्द सजा सुनिश्चित करना है।
कानून के तहत पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, संगठित अपराध के मामलों में कम से कम सात साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
संशोधित कानून की प्रमुख बातें
- सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का अधिकार।
- पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य।
- चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का प्रावधान।
- फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मामलों की रोजाना सुनवाई होगी।
- केंद्र सरकार को जरूरत पड़ने पर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मामलों की पैरवी के लिए एक या अधिक विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की शक्ति।
- किसी भी फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की पीठ में अपील की जा सकेगी, जिसका तीन महीने के भीतर निपटारा करने का प्रावधान है।