भारत में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन का सफल समापन, 2027 में चीन संभालेगा मेजबानी; जानिए रोटेशन की पूरी प्रक्रिया
नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में जुटे दुनिया के शीर्ष नेता, आपसी सहमति और रोटेशन नियम से तय होती है अध्यक्षता

देहरादून: राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का सफलतापूर्वक समापन हो गया। ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलीनिएंस, इनोवेशन, को-ऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वैश्विक नेताओं ने भाग लिया। 13 सितंबर को सम्मेलन के समापन सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि अगला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2027 चीन में आयोजित किया जाएगा।
भारत ने इस साल 1 जनवरी को ब्राजील से ब्रिक्स की अध्यक्षता हासिल की थी। यह चौथा मौका था जब भारत ने इस वैश्विक मंच की मेजबानी की, इससे पहले वर्ष 2012, 2016 और 2021 में भी भारत सफलतापूर्वक यह जिम्मेदारी निभा चुका है। इस वर्ष सम्मेलन में मानव-केंद्रित विकास और मजबूत वैश्विक सहयोग पर विशेष जोर दिया गया, जिससे वैश्विक मंच पर भारत के नेतृत्व की व्यापक सराहना हुई।
ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी का निर्धारण मुख्य रूप से इसके संस्थापक सदस्य देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—के बीच एक रोटेशन प्रणाली के तहत होता है। सामान्य तौर पर यह क्रम संगठन के नाम ‘BRICS’ के अक्षरों के अनुसार आगे बढ़ता है। हालांकि, मेजबान देश का अंतिम निर्णय सभी सदस्य देशों की आपसी सहमति से तय किया जाता है। इसी रोटेशन व्यवस्था के तहत 2024 में रूस, 2025 में ब्राजील और 2026 में भारत के बाद अब 2027 की जिम्मेदारी चीन को सौंपी गई है।
हाल के वर्षों में ब्रिक्स का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश इसके पूर्ण सदस्य बने, जिसके बाद इसके बाद नए सहयोगी देशों को भी जोड़ा गया। अब यह संगठन केवल पांच देशों का समूह न रहकर एक विशाल वैश्विक मंच बन चुका है, जो दुनिया की एक बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है।