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उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की बोर्ड बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय, 13 जनपदों के लिए नई कार्ययोजना तैयार

प्रदेश की अंतिम छोर पर बैठी प्रत्येक महिला तक न्याय पहुँचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है : कुसुम कंडवाल"

देहरादून, 16 सितम्बर 2026। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की वित्तीय वर्ष 2026–27 की प्रथम बोर्ड बैठक निदेशालय, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, देहरादून में आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।

बैठक में महिला सुरक्षा, अधिकार संरक्षण, जनजागरूकता, आयोग की कार्यप्रणाली के सुदृढ़ीकरण तथा आगामी वर्ष की व्यापक कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श करते हुए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मातृशक्ति के सम्मान एवं महिला सशक्तिकरण को राष्ट्रीय विकास का आधार बनाया गया है, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलम्बन एवं गरिमामय जीवन सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रभावी कार्य कर रही है। राज्य महिला आयोग इसी भावना के साथ सरकार एवं प्रशासन के समन्वय में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हेतु प्रतिबद्ध है।

अध्यक्ष ने कहा कि आज उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की कार्यशैली के प्रति महिलाओं का विश्वास निरंतर बढ़ा है। प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय, ग्रामीण एवं सीमांत क्षेत्रों से भी महिलाएँ अपनी शिकायतें और प्रार्थना-पत्र लेकर आयोग तक पहुँच रही हैं। शिकायतों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि महिलाएँ आयोग को न्याय एवं संरक्षण का विश्वसनीय मंच मान रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पीड़ित महिला को समयबद्ध सहायता, विधिक परामर्श और न्याय दिलाना आयोग की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

इसी बढ़ते कार्यभार एवं महिलाओं की अपेक्षाओं को देखते हुए बोर्ड बैठक में आयोग में 10 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। वहीं बोर्ड बैठक के दौरान आयोग के सदस्यगण के मानदेय में यथोचित वृद्धि किए जाने के प्रस्ताव पारित किया गया। स्वच्छता कर्मी के वेतन वृद्धि का भी प्रस्ताव पारित किया गया।

बैठक में उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में आयोग की सक्रिय उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोग की उपाध्यक्षों को जनपदवार दायित्व प्रदान किए गए। ऐश्वर्या रावत को पौड़ी, टिहरी एवं रुद्रप्रयाग, चन्द्रकला तिवारी को उत्तरकाशी एवं चमोली तथा शायरा बानो को ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा एवं पिथौरागढ़ जनपदों की जिम्मेदारी सौंपी गई। सदस्यगण अपने-अपने जनपदों में नियमित जनसुनवाई, महिला जागरूकता कार्यक्रम, वन स्टॉप सेंटर निरीक्षण तथा महिला अधिकार संरक्षण से जुड़े कार्यों का संचालन करेंगे। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि उपाध्यक्ष एवं सदस्यगण निर्धारित जनपद में वन स्टॉप सेंटर में नियमित जनसुनवाई में प्रतिभाग करेंगी तथा स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर महिला अधिकार संरक्षण के कार्यों को गति देंगी।

बैठक के दौरान वन स्टॉप सेंटर, नारी निकेतन, महिला हेल्प डेस्क, साइबर अपराध से जुड़े मामलों तथा विधिक जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी विशेष बल दिया गया। आयोग ने निर्णय लिया कि महिलाओं एवं बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर जागरूकता अभियान संचालित किए जाएंगे।

अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा, “महिला आयोग की वास्तविक सफलता तब होगी, जब उत्तराखंड की अंतिम पंक्ति में बैठी मातृशक्ति, सीमांत क्षेत्र की बेटी और दूरस्थ गाँव की महिला भी यह विश्वास करे कि राज्य महिला आयोग उसके साथ खड़ा है। हमारा प्रत्येक निर्णय महिला गरिमा, सुरक्षा, अधिकार और सशक्तिकरण को समर्पित है।”

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल शिकायतों का समाधान नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की प्रभावी रक्षा करते हुए उन्हें जागरूक, आत्मनिर्भर और आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक रूप से सशक्त बनाना है। राज्य महिला आयोग हर जनपद, हर गाँव और हर परिवार तक अपनी संवेदनशील पहुँच सुनिश्चित करेगा।

बैठक में सदस्य सचिव उर्वशी चौहान, उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत, चन्द्रकला तिवारी एवं शायरा बानो, विधि अधिकारी दयाराम सिंह, प्रशासनिक अधिकारी नारायण सिंह तोमर, उप निरीक्षक स्वाति चमोली, आधार वर्मा, वीरेन्द्र रावत, अंजली ध्यानी सहित आयोग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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