देश में पिछले आठ वर्षों में दर्ज हुए 1557 तेजाबी हमले; पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मामले, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
कड़े कानूनों और बिक्री संबंधी गाइडलाइंस के बावजूद हर दूसरे दिन झुलस रही एक जिंदगी; सर्वोच्च अदालत ने नियमों की समीक्षा और दोषियों की संपत्ति जब्ती का दिया सुझाव
हैदराबाद: देश भर में तेजाब की खुलेआम बिक्री पर सख्त पाबंदियों और सुरक्षा गाइडलाइंस के बावजूद एसिड हमलों की अमानवीय घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति यह है कि देश में हर दूसरे दिन किसी न किसी की जिंदगी तेजाब से झुलस रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले आठ वर्षों (2018 से 2025) के दौरान देश भर में कुल 1557 तेजाबी हमले दर्ज किए गए हैं। इन वारदातों में पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश का स्थान सबसे ऊपर रहा है, जहाँ सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इन मामलों पर गहरी चिंता जताई है और सरकार को नियमों की सख्ती से समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
राज्यसभा में साझा किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2018 से 2025 के बीच पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 376 और उत्तर प्रदेश में 240 मामले सामने आए। इसके अलावा मध्य प्रदेश में 80, गुजरात व राजस्थान में 76-76, महाराष्ट्र में 74, ओडिशा में 72, केरल में 70, हरियाणा में 61 और बिहार में 56 एसिड अटैक की घटनाएं दर्ज की गईं। अकेले वर्ष 2025 में देश भर में 106 मामले सामने आए। हालांकि, देश के कुछ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे भी रहे जहाँ इन आठ वर्षों में एक भी तेजाबी हमला दर्ज नहीं हुआ, जिनमें अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, पुड्डुचेरी, लक्षद्वीप, दादरा एवं नगर हवेली, दमन-दीव और अंडमान-निकोबार शामिल हैं।
अध्ययनों और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, महिलाओं और लड़कियों पर होने वाले तेजाबी हमलों के करीब 75 प्रतिशत मामलों के पीछे पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा, दहेज के झगड़े या आपसी रंजिश जैसे कारण होते हैं। बाजार में तेजाब की आसान उपलब्धता और नियमों की अनदेखी इन वारदातों को बढ़ावा देती है। इसी बीच, एसिड अटैक पीड़िता और दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता शाहीन मलिक द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल सर्कुलर जारी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को तेजाब बिक्री के दिशा-निर्देशों को बेहद सख्ती से लागू करना होगा ताकि लोग कानूनी खामियों का फायदा न उठा सकें।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 124 के तहत एसिड अटैक को एक अत्यंत गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना गया है, जिसमें दोषी के लिए कम से कम 10 साल की कैद से लेकर उम्रकैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है। इसके साथ ही, सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में पीड़ितों के लिए मुफ्त इलाज और अदालती फैसलों के तहत तय समय-सीमा में आर्थिक सहायता व मुआवजा दिए जाने के नियम हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र सरकार से राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों की गहराई से जांच करने को कहा है। साथ ही, अदालत ने सुझाव दिया है कि दोषियों को कड़ी सजा देने और पीड़ितों को समय पर उचित मुआवजा दिलाने के लिए आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने जैसे कड़े कानूनी प्रावधानों पर विचार किया जाना आवश्यक है, ताकि समाज में इस तरह के अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके।