कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या विवाद: हाईकोर्ट ने खारिज की गिरधारी लाल साहू की याचिका, एफआईआर रद्द करने से इनकार
अदालत ने कहा– शारीरिक प्रताड़ना, कूटरचित दस्तावेज और हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोप; प्राथमिक स्तर पर मिनी-ट्रायल संभव नहीं

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय से कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने गिरधारी लाल साहू की उस रिट याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी और प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या द्वारा देहरादून के कैंट थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर को निरस्त करने की गुहार लगाई थी। अदालत के इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द नहीं होगी और पुलिस जांच जारी रहेगी।
न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने दलील दी थी कि दोनों का विवाह वर्ष 2004 में हुआ था और 22 वर्षों के दांपत्य जीवन के बाद यह केवल एक पारिवारिक विवाद है, जिसे आपराधिक रूप दिया जा रहा है। हालांकि, राज्य सरकार के अधिवक्ताओं और शिकायतकर्ता के वकील ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए आरोपी पर जांच में सहयोग न करने तथा संगीन अपराधों में लिप्त होने के तर्क रखे।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफआईआर में लगाए गए आरोप केवल सामान्य वैवाहिक मनमुटाव तक सीमित नहीं हैं। शिकायत में पहली शादी छिपाने, धोखाधड़ी, शारीरिक प्रताड़ना, फर्जी दस्तावेज बनाकर कंपनी के निदेशक पद से हटाने, जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और जान से मारने की साजिश (ऑडियो रिकॉर्डिंग) जैसे गंभीर संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया शामिल हैं।
उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इस स्तर पर अदालत साक्ष्यों का ‘मिनी-ट्रायल’ नहीं कर सकती और न ही 22 साल पुराने रिश्ते के आधार पर बाद में हुए अपराधों की संभावना को खारिज किया जा सकता है। इन आधारों पर याचिका को निरस्त करते हुए अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया।