कुंभ मेले से पहले सनातन संस्कृति के रंगों में सज रही धर्मनगरी हरिद्वार, देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की चित्रकारी कर रही आकर्षित
फ्लाईओवर, दीवारों और प्राचीन इमारतों पर उकेरी जा रही आध्यात्मिक चित्रकारी; नवंबर अंत तक रंग-रोगन कार्य पूरा करने का लक्ष्य

हरिद्वार: आगामी महाकुंभ मेले की तैयारियों के तहत धर्मनगरी हरिद्वार को भव्य और आध्यात्मिक स्वरूप देने का कार्य धरातल पर तेजी से जारी है। कुंभ मेले से जुड़े बुनियादी ढांचागत विकास कार्यों के साथ-साथ शहर के सौंदर्यीकरण और रंग-रोगन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहर के प्रवेश द्वारों, राजमार्गों के फ्लाईओवर, रेल अंडरपास और ऐतिहासिक इमारतों की दीवारों को सनातन धर्म, देवी-देवताओं, पौराणिक ऋषि-मुनियों तथा वेदों की ऋचाओं पर आधारित सुंदर चित्रकारी से सजाया जा रहा है।
कुंभ मेला प्रशासन के अनुसार, इन सजावटी कार्यों का मुख्य उद्देश्य हरिद्वार पहुंचने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश करते ही यहां की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक पहचान का अनुभव कराना है। विशेष रूप से कनखल क्षेत्र की करीब 150 साल पुरानी प्राचीन इमारतों, मठ-मंदिरों और अखाड़ों को एकरूपता देने के लिए विशेष रंगों से रंगा जा रहा है, जबकि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साइनबोर्ड भी एक समान रंग में तैयार कराए जा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, कुंभ बजट से 5 स्थायी पुलों, 4.5 किलोमीटर लंबे नए गंगा घाटों और सड़क नेटवर्क के निर्माण का काम प्रगति पर है। हरकी पैड़ी सहित सभी प्रमुख गंगा घाटों के पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं को सौंपी गई है।
मेला प्रशासन का दावा है कि दीवारों पर चित्रकारी और रंग-रोगन से जुड़ा अधिकांश कार्य नवंबर माह के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। इस पहल से न केवल हरिद्वार की सूरत संवर रही है, बल्कि स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के बीच भी कुंभ आयोजनों को लेकर उत्साह और सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है।