रामपुर तिराहा गोलीकांड की बरसी पर गैरसैंण में मनाया गया ‘काला दिवस’, स्थाई राजधानी घोषित करने की उठी मांग
राज्य आंदोलन के शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

गैरसैंण: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में रामपुर तिराहा गोलीकांड की स्मृति में ‘काला दिवस’ मनाया गया। राज्य आंदोलन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों को नमन करते हुए विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और स्थानीय निवासियों ने एकत्र होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान विभिन्न मंचों से गैरसैंण को जल्द से जल्द राज्य की स्थाई राजधानी घोषित करने की मांग को एक बार फिर प्रमुखता से उठाया गया।
गैरसैंण के रामलीला मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और दो मिनट का मौन रखकर शहीदों की आत्मशांति के लिए प्रार्थना की। इसके पश्चात आंदोलनकारियों ने नगर पंचायत कार्यालय से मुख्य चौराहे तक एक विशाल रैली निकाली और सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि 2 अक्टूबर 1994 को रामपुर तिराहा पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर जा रहे राज्य आंदोलनकारियों पर हुई बर्बरता उत्तराखंड के इतिहास का एक काला अध्याय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य गठन के वर्षों बाद भी जब तक गैरसैंण को पूर्ण रूप से स्थाई राजधानी का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक शहीदों का सपना अधूरा रहेगा। इस मांग को लेकर आने वाले दिनों में प्रदेश भर में चरणबद्ध आंदोलन और अनशन शुरू करने की रणनीति भी तैयार की जा रही है।