उत्तराखंड में पहली बार सीमांत क्षेत्र में कैबिनेट बैठक, कई अहम प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर
राजधानी देहरादून से बाहर चंपावत के बनबसा में आयोजित हुई धामी मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक, जनसमस्याओं और पर्वतीय विकास को गति देने पर जोर

चंपावत: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के प्रशासनिक इतिहास में एक नई पहल करते हुए राजधानी देहरादून के बजाय सीमांत जिले चंपावत के बनबसा में अपनी कैबिनेट बैठक आयोजित की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में आयोजित इस बैठक को प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा और ऊर्जा विभाग से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। विशेष रूप से उपनल कर्मचारियों के मुद्दों, पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी और विभिन्न विभागों से जुड़े जनकल्याणकारी प्रस्तावों को स्वीकृति मिलने की संभावना है। इसके अलावा, आगामी विधानसभा के मानसून सत्र की तिथियों और आयोजन स्थल पर भी विचार किया गया, ताकि 26 अक्टूबर से पहले सत्र की औपचारिक घोषणा की जा सके।
बैठक के दौरान शासन की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया गया कि कैबिनेट की बैठकें अब केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहेंगी। प्रदेश के विभिन्न जिलों और सीमांत क्षेत्रों में बैठकें आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर की समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को सीधे शासन के समक्ष लाना है। सीमांत क्षेत्र सुरक्षा, संस्कृति और विकास की दृष्टि से राज्य की अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी हैं, और वहां बुनियादी ढांचे, रोजगार, पर्यटन तथा कनेक्टिविटी को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
सरकार की इस पहल को पर्वतीय और दूरस्थ जिलों के विकास की दिशा में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और निवासियों के अनुसार, शासन का स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचना क्षेत्र के संतुलित विकास और प्राथमिकताओं को जल्द से जल्द पूरा करने में मददगार साबित होगा।