उत्तराखंड

बिना संसाधनों के आग से जूझ रहे जंगल के सिपाही

उत्तराखंड में बढ़ते फायर सीजन के बीच फायर वॉचर बिना जूते-दस्ताने आग बुझाने को मजबूर, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

उत्तराखंड में जंगलों में आग का खतरा इन दिनों चरम पर है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आग बुझाने वाले वनकर्मी खुद ही सुरक्षित नहीं हैं। रामनगर वन प्रभाग से सामने आई तस्वीरें ज़मीनी हकीकत बयां कर रही हैं, जो सिस्टम के दावों से काफी अलग नजर आती है।
जंगलों को बचाने की जिम्मेदारी जिन लोगों के कंधों पर है, वही बिना जूते, दस्ताने और जरूरी सुरक्षा उपकरणों के आग से लड़ रहे हैं। कई फायर वॉचर साधारण चप्पलों में ही जंगल की आग बुझाने पहुंच जाते हैं। जहां एक छोटी सी चिंगारी पलभर में भयंकर आग बन सकती है, वहां इस तरह काम करना उनके लिए बेहद जोखिम भरा है।


फरवरी से शुरू हुआ फायर सीजन अब अपने अंतिम दौर में है और इस दौरान आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में सबसे पहले मौके पर यही फायर वॉचर पहुंचते हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी जान की परवाह किए बिना जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण को बचाने में जुटे रहते हैं।
इन हालातों में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब जंगलों की रक्षा करने वाले ही सुरक्षित नहीं हैं, तो संरक्षण व्यवस्था कितनी मजबूत है। फिलहाल विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया है कि फायर कर्मियों के लिए जरूरी किट का ऑर्डर किया जा चुका है और जल्द ही उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा।

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