सारा अली खान के केदारनाथ दर्शन पर जारी फतवे को हरिद्वार के संतों ने नकारा: कहा- ऐसे कृत्यों की सराहना होनी चाहिए
अभिनेत्री के समर्थन में आए संत समाज के दिग्गज; धार्मिक सहिष्णुता और सनातन संस्कृति पर खुलकर रखी अपनी बात

हरिद्वार: बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान द्वारा हाल ही में उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के दर्शन करने के बाद उपजा विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। बरेली के एक मौलाना द्वारा अभिनेत्री के खिलाफ फतवा जारी किए जाने और इसे शरीयत के खिलाफ बताए जाने पर हरिद्वार के प्रमुख साधु-संतों एवं धार्मिक संगठनों कड़ी आपत्ति जताई है। संत समाज ने फतवे को खारिज करते हुए कहा कि धार्मिक यात्राओं और आस्था के सम्मान करने वालों की आलोचना के बजाय प्रशंसा होनी चाहिए।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि महाराज ने फतवे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेक और अच्छे कार्य करने वालों के खिलाफ इस प्रकार के संकीर्ण विचार वाले फतवे जारी नहीं किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यों की सराहना होनी चाहिए ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए।
वहीं, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी इस फतवे को अतिवादी सोच करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के विषय समाज का एक वर्ग विशेष ही उठाता है, जिस पर गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है। अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भी इस मामले में अपनी बात रखते हुए कहा कि हिंदू तीर्थस्थल और मंदिर केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सनातन आस्था के जीवंत केंद्र हैं और परंपराओं में आस्था रखने वालों की अभिव्यक्ति का स्वागत होना चाहिए।
गौरतलब है कि अभिनेत्री सारा अली खान ने बीते दिनों केदारनाथ धाम पहुंचकर आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में लगकर बाबा के दर्शन किए थे, जिसके बाद से यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। संत समाज के इन बयानों के बाद धार्मिक सहिष्णुता और व्यक्तिगत आस्था को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।