उत्तराखंड में बढ़ा मानव-वन्यजीव संघर्ष: सर्दियों की दस्तक के साथ पहाड़ों में गुलदार-भालू और मैदान में हाथियों का आतंक, जनता में भारी आक्रोश
पौड़ी में मासूम को गुलदार द्वारा निवाले बनाए जाने पर भड़के ग्रामीणों ने विधायक और अधिकारियों को घेरा; सरकार ने संघर्ष को माना 'आपदा'

देहरादून: उत्तराखंड में मौसम में बदलाव और सर्दियों की शुरुआत के साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ गई हैं। पहाड़ से लेकर मैदान तक जंगली जानवरों की आबादी वाले क्षेत्रों में आवाजाही और हमलों से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित और भयभीत है। पहाड़ी जिलों में गुलदार और भालू सीधे रिहायशी इलाकों और घरों के आंगन तक दस्तक दे रहे हैं, वहीं मैदानी इलाकों में हाथियों के झुंड सड़कों और धार्मिक परिसरों तक पहुंच रहे हैं।
पौड़ी में मासूम पर गुलदार का हमला और ग्रामीणों का गुस्सा
पौड़ी गढ़वाल जिले में गुलदार का आतंक लगातार गहराता जा रहा है। पिछले एक साल में केवल जिला मुख्यालय के 15 किलोमीटर के दायरे में गुलदार के हमलों में 12 लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में खांड्यूसैंण क्षेत्र के वजली गांव में घर के आंगन में खेल रही पांच वर्षीय मासूम बच्ची को गुलदार ने अपना शिकार बना लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में मातम और आक्रोश फैल गया।
घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे स्थानीय विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों का जमकर विरोध किया। आक्रोशित भीड़ ने विधायक के वाहन को घेर लिया और एक बुजुर्ग महिला वाहन के बोनट पर चढ़कर सरकार व वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करने लगी। करीब दो घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद वन विभाग ने गुलदार को आदमखोर घोषित करने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा है।
चमोली में भालुओं का कहर और हरिद्वार में हाथियों की आवाजाही
पहाड़ी जिले चमोली में भालुओं की बढ़ती सक्रियता ने पशुपालकों की नींद उड़ा दी है। पोखरी विकासखंड के विभिन्न गांवों में भालू लगातार गौशालाओं के दरवाजे और छतें तोड़कर मवेशियों (बैलों व गायों) को अपना शिकार बना रहे हैं, जिससे ग्रामीण भारी आर्थिक संकट और डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
दूसरी ओर, मैदानी जिले हरिद्वार में हाथियों का रिहायशी बस्तियों, स्टेडियम के पास की सड़कों और मंदिरों के परिसरों में पहुंचना आम हो गया है। वन विभाग द्वारा हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चुनिंदा हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाने और ‘हाथी मित्रों’ की तैनाती की योजना पर काम किया जा रहा है।
सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को माना ‘आपदा’
बढ़ती घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को ‘आपदा’ के रूप में मान्यता दी है और जिला स्तर पर न्यूनीकरण व प्रबंधन समितियां गठित करने का निर्णय लिया है। वन विभाग का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, ड्रोन से निगरानी करने और वन्यजीवों के मूवमेंट ट्रैक करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं ताकि इस संघर्ष को कम किया जा सके।