न्यूज बुलेटिन लाइव की खबर का असर, मुख्य महाप्रबंधक को आखिरकार सौंपना पड़ा चार्ज
केंद्रीय भंडार में नियुक्ति के बावजूद कार्यभार ग्रहण नहीं कर पा रहे थे हरीश बंसल

देहरादून। उत्तराखंड जल संस्थान में अधिशासी अभियंता स्तर की तैनाती को लेकर पिछले कई दिनों से बना प्रशासनिक गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। पेयजल विभाग के सचिव एवं उत्तराखंड जल संस्थान के अध्यक्ष रणवीर सिंह चौहान के आदेश के बावजूद कार्यभार ग्रहण नहीं कर पा रहे अधिशासी अभियंता हरीश कुमार बंसल को आखिरकार केंद्रीय भंडार का चार्ज सौंप दिया गया है। विभागीय हलकों में इसे न्यूज बुलेटिन लाइव की खबर का असर माना जा रहा है।दरअसल, 21 मई 2026 को जारी आदेश के अनुसार हरीश कुमार बंसल, जो पहले अधिशासी अभियंता, सतर्कता प्रकोष्ठ, देहरादून में तैनात थे, के पूर्व स्थानांतरण आदेश में संशोधन करते हुए उन्हें अधिशासी अभियंता (प्रभारी), केंद्रीय भंडार, उत्तराखंड जल संस्थान, देहरादून की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आदेश में उन्हें तत्काल प्रभाव से नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश भी दिए गए थे।इसके बावजूद केंद्रीय भंडार का कार्यभार उन्हें नहीं सौंपा जा रहा था। विभागीय सूत्रों के अनुसार वहां पहले से अधिशासी अभियंता निशा गौतम कार्यरत थीं और कार्यभार हस्तांतरण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही थी। इससे सचिव स्तर पर जारी आदेश के अनुपालन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे थे।
सूत्रों का कहना था कि निशा गौतम की तैनाती मुख्य महाप्रबंधक स्तर से जारी आदेशों के आधार पर हुई थी, जबकि हरीश बंसल की नियुक्ति संस्थान के अध्यक्ष एवं सचिव रणवीर सिंह चौहान के आदेश के तहत की गई थी। दोनों आदेशों के बीच समन्वय नहीं बन पाने से मामला उलझ गया था।
इस संबंध में न्यूज बुलेटिन लाइव ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर सवाल उठाया था कि जब सचिव एवं संस्थान अध्यक्ष का आदेश जारी हो चुका है तो उसके अनुपालन में देरी क्यों हो रही है। खबर प्रकाशित होने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हुई और अंततः उत्तराखंड जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक को हरीश बंसल को केंद्रीय भंडार का कार्यभार सौंपना पड़ा।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि कार्यभार हस्तांतरण के साथ ही लंबे समय से चला आ रहा प्रशासनिक गतिरोध समाप्त हो गया है। हालांकि इस पूरे प्रकरण ने विभागीय समन्वय, आदेशों के अनुपालन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।अब देखना होगा कि भविष्य में ऐसे मामलों में विभाग किस प्रकार की व्यवस्था सुनिश्चित करता है, ताकि उच्च स्तर से जारी आदेशों के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी की स्थिति उत्पन्न न हो।