हाईकोर्ट से कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू को बड़ा झटका: निरस्तीकरण और गिरफ्तारी पर रोक की याचिका खारिज
न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने सुनाया फैसला; कूट रचित दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और एससी-एसटी एक्ट का मामला निरस्त करने से इनकार

नैनीताल: उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहे विवाद में हाईकोर्ट से गिरधारी लाल साहू को कोई राहत नहीं मिली है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने सुनवाई पूरी करने के बाद सुरक्षित रखा अपना फैसला सुनाते हुए गिरधारी लाल साहू की याचिका को खारिज कर दिया है।
याचिका में गिरधारी लाल साहू ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरधारी लाल साहू को झांसी और उनके भतीजे सतेंद्र राठौर को बरेली से गिरफ्तार कर देहरादून पहुंचा दिया है।
सुनवाई के दौरान कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की ओर से अदालत को बताया गया था कि उनके पति द्वारा उन्हें बदनाम किया जा रहा है और उनका राजनीतिक करियर धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। आरोप लगाया गया कि गिरधारी लाल ने धोखाधड़ी कर उन्हें कंपनियों के निदेशक पदों से हटाया और उनके 80 प्रतिशत शेयर भी बेच दिए। इसलिए याचिका को तुरंत निरस्त किया जाए।
वहीं, गिरधारी लाल साहू के अधिवक्ता ने दलील दी थी कि दर्ज मुकदमा गलत तथ्यों पर आधारित है और निरस्त करने योग्य है। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने कोई फर्जी हस्ताक्षर नहीं बनाए और कंपनियों में निदेशक पद से हटाने की प्रक्रिया मंत्री की सहमति से हुई थी।
रेखा आर्या ने 15 अक्टूबर को देहरादून के कैंट थाने में पति के खिलाफ उत्पीड़न, धोखाधड़ी, जान से मारने की साजिश रचने और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का मामला दर्ज कराया था। एसआईटी जांच में सामने आया कि गिरधारी लाल और उनके भतीजे सतेंद्र राठौर ने कूट रचित दस्तावेजों के जरिए रेखा आर्या को चार कंपनियों (देवों के देव महादेव, बनखंडो रुद्राक्ष धाम, श्री अंबे ऑटो डीलर्स और श्री बनखंडो धाम डेवलपर्स) के निदेशक पद से हटा दिया था। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने और जमानत अर्जी निरस्त होने के बाद पुलिस ने दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।