उत्तराखंडराजनीति

उत्तराखंड पूर्व विधायक संगठन द्वारा राज्यहित के लिए दिए गए महत्वपूर्ण सुझाव

देहरादून

उत्तराखण्ड पूर्व विधायक संगठन का रविवार को झबरेड़ा (हरिद्वार) में सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन में राज्यहित हेतु सम्माननीय पूर्व विधायकों के महत्वपूर्ण सुझाव आए। राज्यहित के निम्नांकित सुझावों पर कार्यवाही अपेक्षित ।

1. उत्तराखण्ड राज्य के अस्तित्व में आने के बाद राज्य में सेवानिवृत होने वाले अधिकारियों को विभिन्न आयोगों, सार्वजनिक निगमों, प्राधिकरणों में पुर्ननियुक्ति देने की परम्परा सी बन गई है, जिसके परिणाम स्वरूप अधिकारी कभी भी सेवानिवृत नहीं हो पा रहे हैं, प्रदेश हित में यह परम्परा समाप्त हो व उक्तानुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत पूर्व जनप्रतिनिधियों को समाहित किया जाए।

2. सरकारी, अर्द्धसरकारी, निजी संस्थानों में विभिन्न रिक्त पदों पर ऑऊटसोर्स एजेन्सियों को बिचौलिया बनाकर नियुक्तियां की जा रही है, जिससे नियुक्ति पाने वाले युवाओं को मिलने वाले वेतन का अधिकतर हिस्सा ऑउटसोर्स एजेन्सी (बिचौलिया) डकार जाती है, यह परंपरा समाप्त कर दी जाए तथा सीधी भर्ती की न्यायसंगत व्यवस्था अपनाई जाए।

3. राज्य में घटित होने वाली दैवीय आपदा के प्रभावितों को विश्व प्रसिद्ध टिहरी बांध की विस्थापन/पुर्नवास नीति के तहत विस्थापन/पुर्नवास किया जाए।

4. दस वर्ष पूर्व केन्द्र सरकार द्वारा अग्निकांड जैसी आपदाओं को दैवीय आपदा परिधि से पृथक कर दिया गया था
जिस कारण अग्निकांड पीडित दैवीय आपदा मानकानुसार सहायता से वंचित हैं, इसलिए अग्निकांड पीडितों को भी पूर्व की भांति दैवीय आपदा परिधि में सम्मिलित कर समुचित राहत/सहायता प्रदान किये जाने हेतु शासनादेश जारी किया जाए।

5. विभिन्न भर्ती आयोगों / एजेन्सियों की भर्ती प्रक्रिया को सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाया जाए व विभिन्न भर्तियों में अनियमितताएं धांधली करने वाले दोषियों को दंडित करने की प्रक्रिया में तीव्रता लाई जाए।

6. सन् 1895 के प्राविधानों के अंतर्गत आवंटित भूमि पट्टा धारकों अन्य भूमि पट्टा धारकों तथा कब्जाधारकों (अनुसूचित जाति/जनजाति / अन्य सामान्य जाति) के भूमि पट्टों को राजस्व अभिलेख दर्ज कर मालिकाना हक प्रदान किया जाए।

7. हिमाचल की भांति उत्तराखण्ड में भी सख्त भू-कानून लागू किया जाए।

8. स्थायी निवास की बाध्यता समाप्त कर पूर्व की भांति मूल-प्रमाण पत्र की व्यवस्था लागू की जाए।

9. युवाओं के कौशल विकास को प्रोत्साहन दिये जाने हेतु बंद कर दिये गये औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों एवं प्राविधिक संस्थानों को सभी ट्रेडो सहित पुर्न स्थापित किया जाए।

10. पलायन रोकने हेतु सौर ऊर्जा संयंत्रों, लघु जल विद्युत परियोजनाओं, भेड़ पशुपालन, पर्यटन, तीर्थाटन, कृषि एवं उद्यानिकी को बढ़ावा देने हेतु प्रभावी नीति लागू की जाए।

11. प्रदेश में चकबन्दी लागू की जाए ताकि किसान समय/श्रम से बचे तथा किसानों को सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ प्राप्त हो सके।

12. जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा हेतु गांव स्तर पर प्रभावी उपाय किये जाएं।

13. विभिन्न सरकारी, अर्द्धसरकारी, गैर सरकारी विभागों/ संस्थानों/उद्योगों में विभिन्न पदों पर भर्ती हेतु आरक्षण की व्यवस्था अपनाई जाए।

14. जनपद- हरिद्वार सहित प्रदेश के समस्त गन्ना किसानों का लम्बित भुगतान शीघ्र किया जाए तथा प्रतिवर्ष भुगतान हेतु नियत समय सुनिश्चित किया जाए।

15. सम्मानित कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल की जाए।

16. उत्तराखण्ड पूर्व विधायक संगठन द्वारा पूर्व में प्रेषित ज्ञापनों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

17. राज्य आन्दोलनकारियों को आरक्षण बिल को अविलम्ब विधानसभा सत्र आहूत कर पारित किया जाए तथा छूटे राज्य आन्दोलनकारियों को चिन्हीकरण किया जाए।

18. राज्य के लगभग 40 हजार संविदा/ऑउटसोर्स कर्मियों का नियमितिकरण/समान कार्य समान वेतन पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।

19. राज्य में बेलगाम नौकरशाही को नियंत्रित किया जाए तथा सम्माननीय पूर्व विधायकों को नौकरशाही द्वारा उचित सम्मान दिया जाए।

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