अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर श्री कृष्णा योगपीठम (स्काई फाउंडेशन) द्वारा ‘हर घर योग, हर रोज योग’ का राष्ट्रव्यापी आह्वान
देहरादून से उत्तर प्रदेश तक विभिन्न संस्थानों में आयोजित हुए योग सत्र, वरिष्ठ नागरिकों, विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने लिया योगमय जीवन का संकल्प

देहरादून 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर, श्री कृष्ण योगपीठम – स्काई फाउंडेशन, देहरादून के संस्थापक और प्रख्यात योगाचार्य कृष्ण अवतार के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक संस्थानों के साथ मिलकर व्यापक स्तर पर योग अभ्यास कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों (Common Yoga Protocol) का पालन करते हुए आयोजित इन सत्रों में सूक्ष्म व्यायाम, आसन, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से समाज में स्वास्थ्य एवं कल्याण के प्रति जागरूकता फैलाई गई।

इस विशेष अवसर पर योगाचार्य कृष्ण अवतार ने समाज के हर वर्ग को साथ जोड़ते हुए निम्नलिखित प्रमुख स्थानों पर योग सत्रों का सफल संचालन किया:
तिब्बती वृद्धाश्रम एवं प्रेमधाम वृद्धाश्रम (डालनवाला, देहरादून): वरिष्ठ नागरिकों को मानसिक शांति और शारीरिक गतिशीलता के लिए विशेष योगाभ्यास कराया गया।
मिशनरीज ऑफ चैरिटी (देहरादून): यहाँ के निवासियों एवं कर्मचारियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए सहज योग सिखाया गया।अखिल भारतीय महिला आश्रम: आश्रम की वृद्धमहिलाओं एवं बालिका विद्यार्थियों को आत्मबल और शारीरिक सुदृढ़ता के लिए योग से जोड़ा गया।

द हंस फाउंडेशन (उत्तरप्रदेश) कम्युनिटी: समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सामुदायिक स्तर पर योग सत्र आयोजित किए गए।सी व्यू सेवा ट्रस्ट: संस्था के अधिकारियों एवं वालंटियर्स को तनाव-मुक्ति और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए योग का अभ्यास कराया गया।
गुरुकुल दून एकेडमी (देहरादून): शिक्षार्थियों (विद्यार्थियों) और समाज के विभिन्न प्रबुद्ध वर्गों को योग की महत्ता से परिचित कराया गया।इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने “हर घर योग, हर रोज योग” के संकल्प को अपने दैनिक जीवन में उतारने की शपथ ली।

योग मात्र एक शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन शैली है: योगाचार्य कृष्ण अवतारमीडिया को संबोधित करते हुए योगाचार्य कृष्ण अवतार ने योग के गूढ़ दर्शन को अत्यंत सरल शब्दों में साझा किया। उन्होंने कहा: हमें यह भ्रम छोड़ना होगा कि योग केवल मैट (आसन) पर बैठकर की जाने वाली क्रिया है। योग हमारी दिनचर्या के हर क्षण में समाहित होना चाहिए। उठते, बैठते, सोते और जागते हुए हमारा चिंतन सजग (Mindful) होना चाहिए। ‘माइंडफुल ईटिंग’ (सजग आहार) और हृदय में करुणा, प्रेम व विश्व-कल्याण की भावना रखना ही सच्चा योग है। जब हम स्वयं को योगमय बनाएंगे, तभी एक स्वस्थ, जागरूक और समृद्ध समाज का निर्माण संभव है। योग के माध्यम से ही हम शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से उत्कृष्ट जीवन जी सकते हैं।”
विकसित भारत @2047 के संकल्प में योग की भूमिका:
उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लक्ष्य को हम जन-जन तक योग पहुंचाकर ही सिद्ध कर सकते हैं। योग हमारी सनातन संस्कृति और पूजनीय ऋषि परंपरा की अमूल्य देन है। हमें इस उत्सव को केवल एक दिन न मनाकर, अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। जीवन में सफलता का एकमात्र मूलमंत्र यही है कि हम योग को अपनाएं, स्वस्थ रहें और निरंतर प्रगति केपथ पर अग्रसर रहें।