
बिहार के गया में चल रहे पितृपक्ष मेले में इस बार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 37 लाख 50 हजार 200 से अधिक तीर्थयात्री और पिंडदानी गयाजी पहुंच चुके हैं। श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण किया।
इस बार देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग गयाजी पहुंचे हैं। रूस, फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्राजील और यूक्रेन के श्रद्धालुओं ने भी धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। अधिकारियों के अनुसार, 8 अक्टूबर को दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य देशों से 30 से 40 और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
गयाजी में आने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। वर्ष 2022 में करीब 9.40 लाख पर्यटक यहां पहुंचे थे। 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 29.89 लाख हो गया, जबकि 2024 में 30.59 लाख पर्यटकों ने गयाजी का रुख किया। वर्ष 2025 में करीब 34.79 लाख पर्यटक यहां पहुंचे थे।
मेले में विदेशी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस बार एआइ आधारित भाषा अनुवाद सेवा भी शुरू की गई है। अब तक 84,756 लोग इसका इस्तेमाल कर चुके हैं। वहीं, पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान के तहत पितृवाटिका में 482 पौधे लगाए गए हैं।
श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए बनाए गए टेंट सिटी में अब तक 11,378 लोगों को सुविधा दी गई। भीड़ के दौरान बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए 10,619 रिस्ट बैंड बांटे गए। मेले के कंट्रोल रूम में अब तक 1,857 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनका संबंधित विभागों ने निपटारा किया।