कॉर्बेट में दुर्लभ ग्रेटर पेंटेड स्नाइप का अनोखा नज़ारा: दो चूजों संग दिखा नर पक्षी, पहली बार मिला सफल प्रजनन का प्रमाण
कोसी नदी के दलदली क्षेत्र में कैमरे में कैद हुई दुर्लभ प्रजाति, विशेषज्ञों ने इसे कॉर्बेट लैंडस्केप में सफल प्रजनन का अहम वैज्ञानिक रिकॉर्ड बताया।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कोसी नदी क्षेत्र से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद खास खबर सामने आई है। यहां पहली बार दुर्लभ ग्रेटर पेंटेड स्नाइप पक्षी को अपने दो नन्हे चूजों के साथ कैमरे में कैद किया गया है। यह दृश्य केवल एक खूबसूरत तस्वीर नहीं, बल्कि इस बात का महत्वपूर्ण प्रमाण भी माना जा रहा है कि इस प्रजाति ने कॉर्बेट लैंडस्केप में सफलतापूर्वक प्रजनन किया है।
इस दुर्लभ पल को प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने कोसी नदी के रिंगोड़ा क्षेत्र के दलदली इलाके में अपने कैमरे में रिकॉर्ड किया। अब तक इस पक्षी की मौजूदगी को लेकर केवल दावे किए जाते रहे थे, लेकिन पहली बार फोटो और वीडियो के जरिए इसके घोंसला बनाने, अंडे देने और चूजों के जन्म का प्रमाण सामने आया है।
ग्रेटर पेंटेड स्नाइप, जिसका वैज्ञानिक नाम Rostratula benghalensis है, आर्द्रभूमि, दलदलों और घास वाले क्षेत्रों में रहने वाला एक दुर्लभ पक्षी है। यह भारत सहित दक्षिण एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। इसकी सबसे दिलचस्प बात इसका पारिवारिक व्यवहार है, जो अधिकांश पक्षियों से बिल्कुल अलग होता है।
इस प्रजाति में अंडे देने के बाद मादा घोंसला छोड़ देती है, जबकि नर अकेले अंडों को सेता है, चूजों को बाहर निकालता है और उनकी पूरी देखभाल करता है। किसी खतरे की स्थिति में वह अपने बच्चों को पंखों के नीचे छिपाकर सुरक्षित स्थान तक ले जाता है। यही अनोखा व्यवहार इस पक्षी को अन्य प्रजातियों से अलग पहचान देता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकॉर्ड केवल एक दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी का सबूत नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत भी है कि कॉर्बेट का प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र आज भी संवेदनशील और दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध करा रहा है। यह खोज उत्तराखंड की जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।