उत्तराखंड

12 साल की कायरा भंडारी: उत्तराखंड की उभरती टेबल टेनिस स्टार, सीनियर्स को दे रही कड़ी टक्कर

महज़ 12 साल की उम्र में जूनियर के साथ सीनियर वूमेंस कैटेगरी में भी दिखा रहीं दमदार खेल

उत्तराखंड की टेबल टेनिस टीम में एक ऐसा नाम तेजी से उभर रहा है, जो उम्र में भले ही छोटा है, लेकिन खेल में बड़े-बड़ों को चुनौती दे रहा है—12 साल की कायरा भंडारी। इतनी कम उम्र में वह सिर्फ सब-जूनियर ही नहीं, बल्कि जूनियर और सीनियर वूमेंस कैटेगरी में भी अपना दम दिखा चुकी हैं।
टेबल टेनिस में आमतौर पर तीन स्तर होते हैं—सब जूनियर, जूनियर और सीनियर। कायरा अभी अंडर-13 (सब जूनियर) में आती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने तीनों ही वर्गों में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में उनके नाम तीन गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल भी दर्ज हैं, जो उनकी मेहनत और प्रतिभा को साफ दिखाते हैं।
हाल ही में देहरादून के परेड ग्राउंड स्थित मल्टीपरपज हॉल में आयोजित 87वीं इंटर स्टेट टेबल टेनिस चैंपियनशिप में भी कायरा उत्तराखंड टीम का हिस्सा बनीं। उन्होंने बताया कि टेबल टेनिस से उनका सफर करीब चार साल पहले शुरू हुआ। इससे पहले वह लॉन टेनिस खेलती थीं, लेकिन बाद में अपने पिता की सलाह पर उन्होंने टेबल टेनिस को चुना—और यही फैसला उनके लिए टर्निंग पॉइंट बन गया।

कायरा रोज़ाना 6 से 8 घंटे प्रैक्टिस करती हैं और साथ ही पढ़ाई भी जारी रखती हैं। क्लास मिस न हो, इसके लिए वह ऑनलाइन पढ़ाई का सहारा लेती हैं। पिछले डेढ़ साल से वह पैसिफिक टेबल टेनिस सेंटर में कोच पराग अग्रवाल के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग ले रही हैं।
उनका अगला लक्ष्य अंडर-15 कैटेगरी में पहुंचकर भारतीय टीम में अपनी जगह बनाना है। इसके लिए वह लगातार मेहनत कर रही हैं। कायरा मानती हैं कि उनके परिवार का सपोर्ट उनकी सबसे बड़ी ताकत है—खासतौर पर उनके माता-पिता, जो हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं।
कायरा की मां लतिका भंडारी बताती हैं कि कोरोना काल में जब पढ़ाई ऑनलाइन हो गई थी, तब उन्होंने कायरा को खेल की ओर और अधिक प्रेरित किया। टेबल टेनिस को चुनने के पीछे एक कारण यह भी था कि यह खेल दिमाग को तेज और सक्रिय बनाता है।
अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए लतिका ने अपना करियर तक छोड़ दिया और अब पूरी तरह कायरा की ट्रेनिंग, डाइट और टूर्नामेंट्स पर ध्यान दे रही हैं। बेहतर ट्रेनिंग के लिए वे लखनऊ में रह रही हैं, जहां कायरा को प्रोफेशनल माहौल मिल रहा है।
कोच का मानना है कि कायरा में अपार संभावनाएं हैं और अगर वह इसी तरह मेहनत करती रहीं, तो आने वाले एक-दो साल में भारतीय टीम में जगह बना सकती हैं। छोटी सी उम्र में बड़ा सपना और उसे पाने का जुनून—यही कायरा भंडारी को खास बनाता है।

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