नितिन नवीन का पूर्व सैनिकों से संवाद, लाल चौक का किस्सा सुनाकर बोले- तब शर्म से झुक गया था सिर
हल्द्वानी में भाजपा अध्यक्ष ने युवाओं और पूर्व सैनिकों से की बातचीत, कश्मीर में तिरंगे से लेकर उत्तराखंड को ‘पंचम धाम’ कहे जाने तक साझा किए अनुभव

हल्द्वानी: उत्तराखंड दौरे के दूसरे दिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हल्द्वानी में पार्टी कार्यकर्ताओं, युवाओं और पूर्व सैनिकों से संवाद किया। दिन की शुरुआत उन्होंने बूथ अध्यक्ष राकेश आर्या के घर जाकर की, जहां उन्होंने परिवार के साथ मुलाकात की और चाय पर बातचीत की। इसके बाद उन्होंने युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार और करियर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
भाजपा अध्यक्ष ने एमबीबीएस समेत अलग-अलग कॉलेजों के विद्यार्थियों के सवाल सुने और उनके साथ भविष्य की संभावनाओं पर बातचीत की। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस कार्यक्रम को युवाओं तक पार्टी की पहुंच मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
नितिन नवीन ने शहीद स्मारक पहुंचकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी। इसके बाद आयोजित गौरव सेनानी मिलन समारोह में उन्होंने पूर्व सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने वर्ष 2011 की कश्मीर यात्रा का एक अनुभव साझा किया।
उन्होंने बताया कि उस समय वह भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री थे और राष्ट्रीय एकता यात्रा की तैयारियों से जुड़े थे। कश्मीर में यात्रा की तैयारियों के दौरान जब वह लाल चौक पहुंचे, तो वहां पाकिस्तान का झंडा देखकर उन्हें बेहद पीड़ा हुई। उन्होंने कहा कि उस समय उनका सिर शर्म से झुक गया था।
नितिन नवीन ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में केवल सत्ता का बदलाव नहीं हुआ, बल्कि सोच में भी बड़ा परिवर्तन आया। उन्होंने कहा कि आज कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा लहराते देख हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा होता है।
उत्तराखंड का जिक्र करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य की पहचान चारधाम से तो है ही, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे वीर सैनिकों की धरती के रूप में ‘पंचम धाम’ की संज्ञा देकर विशेष सम्मान दिया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया।
नितिन नवीन ने उत्तराखंड के सैन्य योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि इसी भूमि ने देश को पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत दिया। उन्होंने राज्य के वरिष्ठ नेता और पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी को भी याद किया।