उत्तराखंडदेहरादून

शिक्षा निदेशालय में हंगामा: पुलिस का बड़ा एक्शन, हिस्ट्रीशीटर समेत 4 गिरफ्तार; जेल भेजे गए आरोपी.

देहरादून: राजधानी के ननूरखेड़ा स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुए बवाल और निदेशक के साथ मारपीट के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया है। थाना रायपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस घटना में शामिल एक हिस्ट्रीशीटर सहित चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

शिक्षा निदेशालय में हंगामा: पुलिस का बड़ा एक्शन, हिस्ट्रीशीटर समेत 4 गिरफ्तार; जेल भेजे गए आरोपी

सीसीटीवी और वीडियो फुटेज से हुई पहचान

रायपुर थाना प्रभारी गिरीश नेगी के अनुसार, पुलिस ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और मौके पर मौजूद वीडियो साक्ष्यों का बारीकी से मिलान किया। जांच के बाद पुलिस ने निम्नलिखित आरोपियों को दबोचा:

  1. अरविंद पुंडीर उर्फ कल्ली (हिस्ट्रीशीटर)

  2. लक्ष्मण नवानी

  3. राकेश थपलियाल

  4. अक्षय राणा

इन आरोपियों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, तोड़फोड़ करने और एक लोक सेवक (निदेशक) के साथ अभद्रता व मारपीट करने के गंभीर आरोप हैं।

क्या था पूरा विवाद?

घटना बीते शनिवार, 21 फरवरी की है। रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ अपने समर्थकों के साथ निदेशालय पहुंचे थे। मामला एक स्कूल के नामकरण को लेकर था—विधायक चाहते थे कि स्कूल का नाम उस भूमि को दान करने वाले दाताओं के नाम पर रखा जाए।

चर्चा के दौरान माहौल अचानक गर्मा गया और बात धक्का-मुक्की तक पहुँच गई। आरोप है कि निदेशालय परिसर में जमकर अराजकता फैली, कुर्सियां फेंकी गईं और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इस हंगामे में निदेशक अजय कुमार नौडियाल समेत कुछ अन्य लोगों को चोटें भी आईं।

आमने-सामने दो मुकदमे दर्ज

पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में निष्पक्षता बरतते हुए दो अलग-अलग FIR दर्ज की हैं:

  • पहली FIR: निदेशक अजय कुमार नौडियाल की तहरीर पर विधायक और उनके समर्थकों के खिलाफ (BNS की विभिन्न धाराओं में)।

  • दूसरी FIR: विधायक के गनर (कांस्टेबल सुशील रमोला) की शिकायत पर निदेशालय के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ, जिसमें मारपीट और हमला करने का आरोप लगाया गया है।

प्रशासन का कड़ा संदेश

शिक्षा विभाग के सर्वोच्च अधिकारी के साथ हुई इस बदसलूकी से कर्मचारियों में काफी रोष है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई को प्रशासन के उस कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ कानून हाथ में लेने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है, चाहे उनका रसूख कुछ भी हो।

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