देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए दो अलग-अलग मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पहले मामले में नेहरू कॉलोनी पुलिस ने सोशल मीडिया विवाद के बाद युवती को हथियार दिखाकर धमकाने वाले युवक को पकड़ा है, वहीं राजपुर पुलिस ने पिछले कई महीनों से लापता एक नाबालिग युवती को आरोपी के चंगुल से छुड़ाकर आरोपी को जेल भेज दिया है।

सोशल मीडिया पर कमेंट से शुरू हुआ विवाद, चापड़ तक पहुंची बात
नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र के राजीव नगर इलाके में बीते दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक युवक हाथ में चापड़ (धारदार हथियार) लेकर एक युवती और उसके साथियों को धमकाता नजर आ रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस तत्काल हरकत में आई।
विवाद की असली वजह: पुलिस की जांच में सामने आया कि यह पूरा विवाद सोशल मीडिया की एक पोस्ट से शुरू हुआ था। युवती ने सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट डाली थी, जिस पर आरोपी शिव सिंह रावत (निवासी राजेंद्र नगर) ने आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणी कर दी। जब युवती अपने कुछ साथियों के साथ आरोपी की लोअर राजीव नगर स्थित दुकान पर इसका विरोध करने पहुँची, तो आरोपी ने मर्यादा लांघते हुए उनके साथ अभद्रता की और चापड़ निकालकर जान से मारने की धमकी दी।
थाना प्रभारी संजीत कुमार ने बताया कि आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
राजपुर पुलिस की बड़ी कामयाबी: चंगुल से छुड़ाई गई नाबालिग
एक अन्य महत्वपूर्ण कार्रवाई में राजपुर थाना पुलिस ने नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर भगाने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है।
घटनाक्रम और पुलिस की कार्रवाई:
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नवंबर 2025 की घटना: राजपुर निवासी एक परिवार ने 4 नवंबर 2025 को अपनी नाबालिग बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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CCTV ने खोला राज: पुलिस टीम ने घटनास्थल के पास के दर्जनों सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिससे पता चला कि मिंटू नाम का एक व्यक्ति युवती को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था।
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गिरफ्तारी: मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने आरोपी मिंटू को आईटी पार्क गेट, सहस्त्रधारा रोड के पास से गिरफ्तार किया और नाबालिग को सुरक्षित छुड़ा लिया।
बढ़ायी गईं धाराएं: राजपुर थाना प्रभारी प्रदीप रावत के अनुसार, युवती के बयानों और मामले की गंभीरता को देखते हुए मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धाराएं बढ़ा दी गई हैं। आरोपी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।