
देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में पिछले कुछ दिनों से जारी उथल-पुथल के बीच शासन ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। रायपुर विधायक के साथ हुए चर्चित मारपीट विवाद के केंद्र में रहे अजय कुमार नौडियाल को अब शासन ने पदोन्नति का ‘तोहफा’ दिया है। लंबे समय से प्रभारी की भूमिका निभा रहे नौडियाल को अब प्रारंभिक शिक्षा के स्थायी निदेशक के रूप में नियुक्त कर दिया गया है।
लंबे इंतजार के बाद मिली स्थायी जिम्मेदारी
अजय कुमार नौडियाल अब तक अपर शिक्षा निदेशक के पद पर तैनात थे और उनके पास प्रारंभिक शिक्षा निदेशक का अतिरिक्त प्रभार था। उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया काफी समय से लंबित थी। आखिरकार, पदोन्नति चयन समिति की सिफारिशों के बाद शिक्षा सचिव रविनाथ रमन ने उनकी स्थायी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए। शासन के इस फैसले को विभाग में उनके अनुभव और प्रशासनिक निरंतरता पर मुहर के रूप में देखा जा रहा है।
सुर्खियों में रहा ‘विधायक बनाम अधिकारी’ विवाद
गौरतलब है कि अजय कुमार नौडियाल का नाम हाल ही में तब सुर्खियों में आया था जब रायपुर से भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ और उनके समर्थकों पर निदेशालय के भीतर ही नौडियाल के साथ अभद्र व्यवहार और धक्का-मुक्की करने के आरोप लगे थे।
विवाद का कारण: यह घटना कार्यालय के भीतर हुई थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ।
शिक्षकों का आक्रोश: इस घटना के बाद पूरे प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया और अधिकारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए।
माफी और समझौता: बढ़ते दबाव और शिक्षकों के आक्रोश को देखते हुए अंततः विधायक उमेश शर्मा काऊ को सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करना पड़ा था।
प्रशासनिक ‘मरहम’ या नियमानुसार प्रक्रिया?
राजनीतिक गलियारों में इस प्रमोशन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। जहाँ एक ओर शासन इसे पूरी तरह से नियमानुसार की गई पदोन्नति बता रहा है, वहीं दूसरी ओर जानकारों का मानना है कि विवाद के बाद अधिकारी का मनोबल बढ़ाने और शिक्षक संगठनों के गुस्से को शांत करने के लिए यह एक ‘मरहम’ की तरह काम करेगा। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
नई जिम्मेदारी, पुरानी चुनौतियां
स्थायी निदेशक के रूप में अजय कुमार नौडियाल के सामने अब कांटों भरा ताज है। उत्तराखंड की प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उनके सामने मुख्य चुनौतियां निम्नलिखित हैं:
शिक्षक तैनाती: दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करना।
बुनियादी ढांचा: सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों और सुविधाओं में सुधार।
गुणवत्ता: प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा के स्तर को निजी स्कूलों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाना।
अब देखना यह होगा कि स्थायी निदेशक के रूप में नौडियाल इन चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और विभाग में अपने नए कार्यकाल के दौरान अनुशासन और विकास के बीच कैसे सामंजस्य बिठाते हैं।
