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बीकेटीसी की बजट बैठक: 2026–27 के लिए 121 करोड़ से अधिक का बजट पास,

बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव

देहरादून, 10 मार्च: बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की बजट बैठक मंगलवार को अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में देहरादून स्थित केनाल रोड कार्यालय परिसर में आयोजित हुई। बैठक में वर्ष 2026–27 के लिए 121 करोड़ 7 लाख 99 हजार 501 रुपये से अधिक का अनुमानित बजट पारित किया गया।

बैठक में बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने सहित यात्रा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।

बजट में बदरीनाथ धाम के लिए 57 करोड़ 47 लाख 39 हजार 601 रुपये तथा केदारनाथ धाम के लिए 63 करोड़ 60 लाख 59 हजार 900 रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित आय के सापेक्ष 99 करोड़ 45 लाख 36 हजार 651 रुपये का व्यय दर्शाया गया है। बैठक का संचालन मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने किया और पिछली बोर्ड बैठक की अनुपालन आख्या के साथ वर्ष 2026–27 का बजट प्रस्तुत किया।

अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि चारधाम यात्रा का शुभारंभ अप्रैल माह से होने जा रहा है, जिसे ध्यान में रखते हुए बजट में आवश्यक प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल, बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे, जबकि गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) को खोले जाएंगे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है। राज्य सरकार के स्तर पर यात्रा तैयारियां तेज गति से जारी हैं।

द्विवेदी ने कहा कि समिति का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सरल और सुगम दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराना है। इसके लिए बजट में आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं और अधिकारियों को यात्रा से पहले सभी तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में धामों में यात्रा पूर्व व्यवस्थाओं को मजबूत करने, ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप में मंदिर समिति का शिविर कार्यालय खोलने, मंदिर परिसर में निर्धारित दूरी तक मोबाइल फोन पर प्रतिबंध, बीकेटीसी अधिनियम के कुछ प्रावधानों में संशोधन, रावल की नियुक्ति से जुड़ी नियमावली और परंपराओं पर विचार, पूजा-दर्शन व्यवस्था में सुधार, कर्मचारियों की पदोन्नति, अस्थायी कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने और मानदेय बढ़ाने जैसे प्रस्ताव भी पारित किए गए।

इसके अलावा आदि बदरी मंदिर को बीकेटीसी में शामिल करने, मर्कंटेश्वर मंदिर के सभा मंडप के पुनर्निर्माण, कर्मचारियों के वेतन-पेंशन के लिए रिवॉल्विंग फंड बनाने, यात्रा एवं दर्शन एसओपी, मंदिर परिसर और दर्शन पंक्ति की रेलिंगों की मरम्मत, रंग-रोगन, पेयजल, विद्युत व्यवस्था, स्वच्छता, विश्राम गृहों में आवासीय व्यवस्था और ऑनलाइन पूजा प्रणाली को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने पर भी चर्चा हुई।

समिति ने निर्णय लिया कि यात्रा सीजन के दौरान बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए दर्शन व्यवस्था और आधारभूत ढांचे को और मजबूत किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

बैठक में उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, विजय कप्रवाण, सदस्य धीरज मोनू पंचभैया, महेंद्र शर्मा, प्रह्लाद पुष्पवान, देवी प्रसाद देवली, राजेंद्र प्रसाद डिमरी, डॉ. विनीत पोस्ती, नीलम पुरी, दिनेश डोभाल, राजपाल जड़धारी, राजकुमार तिवारी, रजनीश भट्ट, वित्त अधिकारी मनीष उप्रेती, विधि अधिकारी एस.एस. बर्त्वाल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी, निजी सचिव प्रमोद नौटियाल, मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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