उत्तराखंडदेहरादून

डीएम कोर्ट में हंगामा: वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण की संस्तुति देहरादून।

जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में अदालती कार्यवाही के दौरान कथित अभद्र व्यवहार और न्यायालय की गरिमा भंग करने के आरोप में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं दून बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद शर्मा के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने अधिवक्ता अधिनियम-1961 के तहत उत्तराखंड राज्य बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को रिपोर्ट भेजते हुए अधिवक्ता के लाइसेंस निरस्तीकरण पर विचार करने का अनुरोध किया है। साथ ही उत्तराखंड विधिज्ञ परिषद, नैनीताल के सचिव को भी इस संबंध में पत्र प्रेषित किया गया है।

डीएम कोर्ट में हंगामा: वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण की संस्तुति

क्या है पूरा मामला?
प्रशासन के अनुसार, 25 मार्च को कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में मैसर्स दून वैली बनाम सरकार वाद की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा ने कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न किया और पीठासीन अधिकारी के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।
इसके अलावा, शेख मोईसुद्दीन बनाम मौला बख्श मामले की सुनवाई के दौरान भी उनके द्वारा न्यायालय और कर्मचारियों के प्रति कथित रूप से अशोभनीय व्यवहार किए जाने की बात सामने आई है।
जिला प्रशासन ने इन कृत्यों को न्यायालय की गरिमा के विपरीत और पेशेवर आचरण का गंभीर उल्लंघन मानते हुए इसे प्रोफेशनल मिसकंडक्ट की श्रेणी में रखा है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश
रिपोर्ट में मामले को अनुशासन समिति को सौंपने और जांच के दौरान अधिवक्ता के प्रैक्टिस अधिकारों को निलंबित करने पर भी विचार करने की बात कही गई है।
साथ ही, राज्य बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भी विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है, जहां इस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी लग चुके हैं आरोप
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित अधिवक्ता के खिलाफ पूर्व में भी न्यायालय में अभद्र व्यवहार, सहकर्मियों पर दबाव बनाने और अनुशासनहीनता के आरोप सामने आते रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि एक वरिष्ठ अधिवक्ता से मर्यादित और संतुलित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है, लेकिन बार-बार ऐसे आरोप न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।

रासुका का भी जिक्र
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा पूर्व में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) 1980 के तहत निरुद्ध रह चुके हैं। हालिया घटनाओं के चलते उनका नाम फिर चर्चा में आया है।
अब इस पूरे प्रकरण की जांच अनुशासन समिति द्वारा की जाएगी, जिसके आधार पर लाइसेंस निलंबन, अस्थायी रोक या स्थायी निरस्तीकरण जैसे फैसले लिए जा सकते हैं।

अधिवक्ता का पक्ष
वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने केवल न्यायालय में सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई थी।
उनके अनुसार,
“जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में वादों की सुनवाई मनमर्जी से होती है। तय तारीख पर अक्सर सुनवाई नहीं होती और अगली तारीख की जानकारी भी नहीं दी जाती। मैंने सिर्फ इसी मुद्दे पर आपत्ति उठाई थी। अभद्र टिप्पणी जैसा कोई कृत्य मैंने नहीं किया। यदि प्रशासन यह सोचता है कि रिपोर्ट से मुझ पर दबाव बनेगा, तो ऐसा नहीं है। मैं अधिवक्ताओं के हित में आवाज उठाता रहूंगा।”

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