उत्तराखंडदेहरादून

नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनने की ओर महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक कदम – कुसुम कंडवाल.

​देहरादून: आज देहरादून में सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस अवसर पर उनके साथ समाजसेवी डॉ. पारुल दीक्षित एवं अधिवक्ता शिखा शर्मा बिष्ट भी उपस्थित रहीं।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनने की ओर महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक कदम – कुसुम कंडवाल

प्रेस वार्ता के दौरान अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ को भारतीय लोकतंत्र का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। उन्होंने विशेष रूप से 16 अप्रैल को होने वाली संसद की ऐतिहासिक बैठक का उल्लेख किया, जो इस अधिनियम को जमीन पर उतारने की दिशा में निर्णायक मोड़ साबित होगी।

अध्यक्ष ने बताया कि सितंबर 2023 में पारित यह संवैधानिक संशोधन लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित सुनिश्चित करता है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लोकसभा में महिलाओं की संख्या 1952 में मात्र 22 थी, जो 2024 में बढ़कर 75 हुई है, लेकिन यह अभी भी आदर्श स्थिति से दूर है। यह अधिनियम इस अंतर को पाटकर महिलाओं को शासन के केंद्र में लाएगा।

कुसुम कंडवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए कहा कि भारत अब ‘महिलाओं के विकास’ से आगे बढ़कर ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “जब महिलाएँ नेतृत्व करती हैं, तो अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है और समावेशी विकास सुनिश्चित होता है”। वैश्विक शोध के अनुसार, लैंगिक अंतर कम होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में 7 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हो सकती है।

प्रेस वार्ता में महिला सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े साझा करते हुए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मुद्रा योजना के तहत 69% ऋण महिलाओं को दिए गए। जन धन योजना के तहत 32.29 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खुले। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन 80.2% तक पहुँचा। साथ ही, भारत में 43% STEM ग्रेजुएट महिलाएँ हैं। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 4.6 करोड़ से अधिक खाते बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए खोले गए।

उन्होंने बताया कि उज्ज्वला योजना के 10 करोड़ LPG कनेक्शन, जल जीवन मिशन के तहत 14.45 करोड़ घरों में नल से जल और स्वच्छ भारत मिशन ने महिलाओं को गरिमापूर्ण जीवन दिया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को पोषण सहायता मिली है।

जब महिलाओं को संवैधानिक अवसर मिलता है, तो वे जल, शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य जैसे विभिन्न बुनियादी मुद्दों पर क्रांतिकारी बदलाव लाती हैं। यह अधिनियम @2047 के विकसित भारत संकल्प की आधारशिला है। भारत अब ‘महिलाओं के विकास’ से आगे बढ़कर ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ (Women-led Development) की राह पर चल पड़ा है, जो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट दृष्टि कोण रहा है कि महिला नेतृत्व वाला विकास ही भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है, नारी शक्ति वंदन
अधिनियम का क्रियान्वयन उसी दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासि क पहल है जो आने वाले समय में भारत के लोकतंत्र और विकास मॉडल को और सशक्त बनाएगा।

कुसुम कंडवाल ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ-साथ नारी शक्ति की भी भूमि है। राज्य महिला आयोग इस अधिनियम के सफल क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ताकि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र को और अधिक पारदर्शी और संवेदनशील बनाए।

​”यह अधिनियम महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।”

​अध्यक्ष ने अंत में समस्त मातृशक्ति और समाज से इस ऐतिहासिक बदलाव का समर्थन करने का आह्वान किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!