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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते भारत में आर्थिक सावधानी बरतने की जरूरत: विशेषज्ञ

पीएम मोदी ने वैश्विक मुश्किल समय में भारत को मजबूत बनाने के लिए 7 जरूरी अपील की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे डॉलर में खरीदे गए उत्पादों का इस्तेमाल ज़्यादा समझदारी से करें और अनावश्यक उपभोग से बचें. विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच, भारत का चालू खाता घाटा दबाव में आ सकता है.

 

ऐसी स्थिति में सरकार आयातित वस्तुओं और कमोडिटीज के अत्यधिक उपभोग को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाती दिख रही है, जिनके लिए बड़ी मात्रा में डॉलर खर्च करने की जरूरत होती है. कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं, आपूर्ति में रुकावटों और आयात की बढ़ी हुई लागत के कारण आने वाले महीनों में कुछ वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं.उनके अनुसार सरकार के इस संदेश का उद्देश्य लोगों को संभावित महंगाई के दबाव के लिए तैयार करना और परिवारों को अपने खर्च की योजना ज़्यादा सावधानी से बनाने के लिए प्रोत्साहित करना भी है.

PM ने क्या कहा?

10 मई, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, वैश्विक ऊर्जा में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में रुकावटों से पैदा हो रहे आर्थिक दबावों को देखते हुए, खर्च करने और उपभोग करने की आदतों में ज़्यादा सावधानी बरतें.सिकंदराबाद में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम ने लोगों से अपील की कि वे ईंधन का इस्तेमाल कम करें, जहाँ तक हो सके मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें, जब मुमकिन हो तो ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) की व्यवस्था अपनाएं और एक साल तक गैर-जरूरी विदेश यात्रा से बचें.उन्होंने लोगों को सोने की खरीदारी टालने की भी सलाह दी, और इस बात पर ज़ोर दिया कि विदेशी मुद्रा बचाना और आयात पर दबाव कम करना जरूरी है. पीएम मोदी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से वैश्विक संघर्षों और रुकावटों ने सप्लाई चेन पर दबाव डाला है और दुनिया भर के देशों में कीमतें बढ़ा दी हैं.इस पृष्ठभूमि में उन्होंने सामूहिक संयम और ‘कर्तव्य पहले’ की सोच अपनाने का आह्वान किया, और साथ ही यह भी कहा कि सरकार ने भारतीय उपभोक्ताओं को वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतों के पूरे असर से बचाने के लिए काम किया है.

 

पश्चिम एशिया संकट के बीच आर्थिक चिंताएं

अर्थशास्त्री और नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने ईटीवी भारत को बताया कि तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में चल रहे संकट ने भारत के बाहरी खाता संतुलन को और भी ज़्यादा कमजोर बना दिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चालू खाता घाटा और बढ़ता है, तो रुपया और भी ज़्यादा कमज़ोर हो सकता है.

कुमार ने कहा कि मौजूदा हालात में प्रधानमंत्री की अपील अहम है, क्योंकि आयातित सामानों की खपत कम करने से विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है. उन्होंने कहा, ‘अगर हम उन आयातों को कम कर पाते हैं जिनसे बचा जा सकता है, तो इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रुपये को कमज़ोर होने से रोकने में भी मदद मिलेगी.’

 

उन्होंने आगे कहा कि अर्थव्यवस्था के इस दौर में ऐसे कदम उठाना जरूरी है. उन्होंने यह भी साफ किया कि जरूरी आयातों से तो बचा नहीं जा सकता, लेकिन जहाँ भी खपत कम की जा सकती है, लोगों को ऐसा करने की कोशिश करनी चाहिए. उर्वरकों का ज़िक्र करते हुए कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बार-बार उनके ज़्यादा कुशल और संतुलित इस्तेमाल की अपील की है, और कहा कि इस सलाह का पालन करना अब फ़ायदेमंद साबित हो सकता है.

 

क्या ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी अब तय है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीने आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं. अगर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती है, तो ईंधन की कीमतों में एक और बढ़ोतरी की संभावना है. दिल्ली स्थित थिंक टैंक ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (GTRI) की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत को जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक और बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के निशान के आसपास बनी हुई है.

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