
देहरादून: उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। आयोग प्रदेश के हर जिले में ऐसी संस्थाओं और आवासों को चिन्हित करेगा, जहां रेस्क्यू किए गए बच्चों को सुरक्षित और बेहतर माहौल उपलब्ध कराया जा सके।
राज्य स्तरीय समन्वय बैठक में बच्चों के विरुद्ध बढ़ती हिंसा, गुमशुदगी के मामले, बाल तस्करी, यौन शोषण और अन्य सामाजिक समस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बच्चों के संरक्षण के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिया गया।
आयोग की ओर से हर जिले में दो से चार ऐसी संस्थाओं की पहचान की जाएगी, जो जरूरतमंद और रेस्क्यू किए गए बच्चों को रखने के लिए उपयुक्त होंगी। जांच के बाद इन संस्थाओं को ‘फिट संस्था’ घोषित किया जाएगा, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण, देखभाल और जरूरी सुविधाएं मिल सकें।
बैठक में नशे की चपेट में आए बच्चों के पुनर्वास को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया। बच्चों के बेहतर इलाज और देखभाल के लिए प्रत्येक जिला अस्पताल में दो बेड आरक्षित करने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे प्रभावित बच्चों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
आयोग ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बाल संरक्षण से जुड़े सभी विभागों को मिलकर काम करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए।