उत्तराखंड वन विभाग में तबादलों का सिलसिला जारी, ट्रांसफर सीजन खत्म होने के बाद भी बढ़ीं संशोधन की मांगें
नई तैनाती से असंतुष्ट अधिकारी-कर्मचारी लगातार दे रहे हैं आवेदन, कई मामलों में अब शासन स्तर पर होगा अंतिम फैसला।

उत्तराखंड में वर्ष 2026 का तबादला सत्र भले ही औपचारिक रूप से समाप्त हो चुका हो, लेकिन वन विभाग में स्थानांतरण से जुड़े मामलों का काम अभी भी जारी है। विभाग इन दिनों तबादलों से संबंधित आवेदनों, संशोधन प्रस्तावों और प्रत्यावेदनों के निस्तारण में व्यस्त है। बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी अपनी नई तैनाती में बदलाव की मांग कर रहे हैं, जबकि कई अन्य अब भी स्थानांतरण की उम्मीद में आवेदन दे रहे हैं।
इस बार वन विभाग ने प्रशासनिक जरूरतों और रिक्त पदों को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर स्थानांतरण किए थे। विभाग का उद्देश्य लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों को नई जिम्मेदारी देना और कार्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना था। इसी क्रम में एसडीओ, डिप्टी रेंजर, वन दरोगा और वन आरक्षी सहित विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों के तबादले किए गए।
हालांकि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद कई अधिकारी और कर्मचारियों ने अपनी नई पोस्टिंग को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कुछ ने पारिवारिक परिस्थितियों, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और बच्चों की पढ़ाई का हवाला देते हुए नई तैनाती में बदलाव की मांग की है। वहीं कुछ अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक और व्यक्तिगत कारणों से वर्तमान तैनाती उनके लिए व्यावहारिक नहीं है।
वन विभाग को अब तक केवल वन आरक्षी और वन दरोगा संवर्ग से ही दर्जनों आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। अन्य संवर्गों से भी लगातार अनुरोध पत्र विभाग तक पहुंच रहे हैं। चूंकि तबादला सत्र समाप्त हो चुका है, इसलिए अब किसी भी संशोधन या नए स्थानांतरण पर निर्धारित नियमों के तहत ही निर्णय लिया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े मामलों में अंतिम फैसला शासन स्तर पर होगा, जबकि अन्य कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा वन मुख्यालय और प्रमुख वन संरक्षक स्तर पर की जा रही है।
विभाग के सामने एक और चुनौती यह भी है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद कई अधिकारी और कर्मचारी अभी तक अपनी नई तैनाती वाले स्थान पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर सके हैं। कुछ मामलों में संबंधित कार्यालयों से समय पर कार्यमुक्त नहीं किया गया है, जबकि कुछ कर्मचारी स्वयं भी नई पोस्टिंग पर समय से नहीं पहुंचे हैं। इसका असर कई क्षेत्रों की कार्य व्यवस्था पर पड़ रहा है।
वन विभाग का कहना है कि हर आवेदन की समीक्षा तथ्यों और नियमों के आधार पर की जा रही है। केवल व्यक्तिगत सुविधा या पसंद के आधार पर तबादलों में बदलाव नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में शासन और विभागीय मुख्यालय द्वारा लिए जाने वाले फैसलों पर कर्मचारियों और अधिकारियों की नजर बनी रहेगी।