पिथौरागढ़ में बाल यौन शोषण सामग्री साझा करने के आरोप में तीन महिलाओं पर केस दर्ज
गृह मंत्रालय के इनपुट के बाद साइबर जांच में सामने आया मामला, सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच जारी; पुलिस ने सख्त कार्रवाई की बात कही

चाइल्ड पॉर्नोग्राफी में जिले की तीन महिलाओं का नाम सामने आया है. तीनों महिलाओं ने कई लोगों को बच्चों की अश्लील वीडियो और फोटो शेयर कर दी. भारत सरकार गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद जांच हुई तो इन महिलाओं का हकीकत उजागर हुई. जांच के बाद पुलिस ने तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. साथ ही मामले की विवेचना की जा रही है. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पिथौरागढ़ निवासी महिलाएं लंबे समय से लोगों को फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम के जरिये बच्चों की अश्लील वीडियो शेयर कर रही थी. अब तक तीनों कई महिलाएं लोगों को इस तरह की अश्लील वीडियो शेयर कर चुकी हैं. जब गृह मंत्रालय की नजर महिलाओं के इस अपराध पर पड़ी तो साइबर सेल को जांच के निर्देश जारी हुए. साइबर सेल ने तीनों महिलाओं के सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर गड़ाई और इन्हें खंगाला तो उनका कारनामा सार्वजनिक हुआ और गृह मंत्रालय के आरोप सही मिले. जिस पुलिस ने इसका सोशल मीडिया का अकाउंट जांच कर मोबाइल भी अपने कब्जे में ले लिया है. जिसकी जांच की जा रही है. चाइल्ड पॉर्नोग्राफी में शामिल होने के तीनों महिलाओं के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण हैं. तीनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस तरह अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा. -गोविंद बल्लभ जोशी,पुलिस उपाधीक्षक- पिथौरागढ़ जिले में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के दो मामले पूर्व में भी सामने आ चुके हैं. धारचूला बलुवाकोट और सैणराथी में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी में दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी. हैरानी की बात है कि बलुवाकोट में सामने आए चाइल्ड पॉर्नोग्राफी में भी महिला शामिल थी. ऐसे मामलों में महिलाओं के शामिल होने से पुलिस विभाग की हैरान है. पिछले माह गंगोलीहाट क्षेत्र से भी एक चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले पर गिरफ्तारी हुई थी. बता दें कि भारत में चाइल्ड पोर्नोग्राफी यौन शोषण से संबंधित बच्चों की अश्लील सामग्री का निर्माण रखना साझा करना देखना या प्रसारित करना एक गंभीर अपराध है. पॉक्सो एक्ट के तहत बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री बनाना संग्रह करना साझा करना या प्रसारित करना अपराध है. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम IT Act धारा 67B के तहत भी बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री प्रकाशित करना डाउनलोड करना देखना भेजना या प्रसारित करना दंडनीय है. पहली बार अपराध अधिकतम 5 वर्ष तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना. दोबारा अपराध अधिकतम 7 वर्ष तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना. यदि कोई व्यक्ति किसी बच्चे का यौन शोषण करता है या ऐसी सामग्री बनाता है तो परिस्थितियों के अनुसार POCSO Act की अन्य धाराओं में इससे भी अधिक कठोर सजा हो सकती है.